स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट में स्टेट कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट के लिए दस करोड़ की ग्रांट केंद्र सरकार से मिल गई है। ग्रांट देने संबंधी पत्र भी राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य के पास पहुंच गया है। हालांकि वन विभाग की जमीन का पेच अब भी सुलझा नहीं है। अमर उजाला ने 21 नवंबर के अंक में स्टेट कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट को स्वीकृति मिलने संबंधी खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी।
केंद्र सरकार ने 120 करोड़ रुपये की लागत के स्टेट कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट प्रोजेक्ट को 2014 में राजकीय मेडिकल कालेज हल्द्वानी को दिया था। केंद्र सरकार और मेडिकल कालेज प्रबंधन की ओर से इंस्टीट्यूट को लेकर पत्राचार चल रहा था। दो महीने पहले केंद्र सरकार की टीम ने स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट पहुंचकर निरीक्षण किया था।
स्टेट कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट के लिए पिछले वर्ष 152 स्थायी पद स्वीकृत हो गए थे। इंस्टीट्यूट में सौ बेड का नया अस्पताल बनने के साथ ही नए उपकरण भी आएंगे। हालांकि लगभग 14 हेक्टेयर वन भूमि को लेकर पेच अब भी फंसा है। मेडिकल कालेज प्रबंधन और शासन के बीच जमीन हस्तांतरित करने को लेकर प्रक्रिया चल रही है। स्टेट कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट में सौ से अधिक कर्मचारी आउटसोर्स से रखे जाएंगे। साथ ही 19 विभाग बनेंगे।
ये विभाग होंगे...
निदेशक कैंसर इंस्टीट्यूट, कैंसर जेनेटिकस (रिसर्च), मेंटीनेंस (बायोमेडिकल), प्रीवेंटिव अंकोलॉजी, न्यूरिलयर मेडिसिन, रेडिएशन अंकोलॉजी, मेडिकल अंकोलॉजी, सर्जिकल अंकोलॉजी, मेजर ओटी, पीडियाट्रिक्स अंकोलॉजी, पैलिएटिव मेडिसिन एंड पेन क्लीनिक, रेडिएशन फिजिक्स, रेडियो डायग्नोसिस, एनस्थीसियोलाजी एवं आईसीयू, ट्रासंफ्यूजन मेडिसिन, कैंसर रेजिस्ट्री एंड मेडिकल रिकॉर्ड, पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलाजी, बायोकेमिस्ट्री और डेंटल सर्विस।
स्टेट कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट को स्वीकृति मिल गई है। केंद्र सरकार की ओर से दस करोड़ रुपये की ग्रांट दी गई है। इंस्टीट्यूट को बनने में दो से तीन वर्ष का समय लगेगा। जमीन हस्तांतरण का पेच भी जल्द सुलझा लिया जाएगा।
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डॉ. केसी पांडे, विभागाध्यक्ष स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट