बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से जौनसार बावर क्षेत्र के काश्तकारों के माथे पर चिंता की लकीरें पड़ गई हैं। बृहस्पतिवार देर रात और शुक्रवार सुबह क्षेत्र के कई गांवों में जमकर ओलावृष्टि हुई। इससे बड़े भूभाग में खड़ी मटर की फसल पूरी तरह से चौपट हो गई है।
करीब 80 से अधिक गांवों में फसल का उत्पादन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। काश्तकारों को भूख और कर्ज की चिंता सताने लगी है। वहीं, ओलावृष्टि के बाद शुक्रवार को तहसील प्रशासन की टीम ने क्षेत्र के गांवों का दौरा कर क्षतिपूर्ति के आकलन की रिपोर्ट तैयार की।
काश्तकार मायाराम सिंह, दीवान सिंह, सुरेंद्र सिंह बिष्ट, भीम सिंह, जीवन सिंह, भगतराम शर्मा, कृपाल सिंह, सिया चौहान, परम सिंह, गुमान तोमर, नरेश चौहान, सीताराम आदि का कहना है कि छह मार्च के बाद से लगातार क्षेत्र में रुक-रुक कर बारिश और ओलावृष्टि का दौर जारी है। काश्तकारों ने महंगा लोन लेकर मटर की खेती की थी। लेकिन, बारिश और ओलावृष्टि ने सब चौपट कर दिया। यदि सरकार की ओर से उनकी आर्थिक सहायता नहीं की जाती तो उनके सामने भूखों मरने की नौबत आ सकती है।
जौनसार बावर क्षेत्र में मटर की बड़े पैमाने पर खेतीबाड़ी की जाती है। यहां के मटर की देहरादून, विकासनगर के साथ ही सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, मेरठ, मुरादाबाद की मंडियों में खासा डिमांड रहती है।
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इन गांवों में चौपट हुई फसल
दातनू, बडनू, मलेथा, बराड़ा, अलसी, पानुवा, कनबुआ, सकनी, ककाड़ी, पंजिया, कोठा, तारली, सलगा, बोहा, खमरोली, भंजरा, सुरेऊ, मलोऊ, कोथी, अस्टाड़, लोरली, मताड़, हाजा, दसोऊ, डाडुवा, कितरोली, गबेला, दोधा, सुनोड़ा, मटियाना, भुपोऊ, हिड़का, कलेथा, गोना, जगथाना, बुराइला, होडा, मंगरोली, क्वारना, टिपऊ, चंदोऊ, जिसोऊ, नेवी, कुरोली, खतासा, बोहरी, उद्पाल्टा, उपरोली, रानी, बिसोऊ, मिरमाऊ, बंतोऊ, मसराड़, बसाया, ललोऊ, गड़ेता, जोशीगांव, गोथान, भुगतार, खतार, समाया, कोपटी समेत 80 से अधिक गांव में मटर की फसल पूरी तरह से तबाह हो गई है।
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सभी राजस्व उपनिरीक्षकों को क्षतिपूर्ति का आकलन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं। रिपोर्ट मिलते ही कार्रवाई के लिए शासन को भेजी जाएगी।
डॉ. अपूर्वा सिंह, एसडीएम, जौनसार परगना
साहिया क्षेत्र के कोठा तारली गांव में ओलाबृष्टी से क्षतिग्रस्त फसल का निरीक्षण करने पहुंची राजस- फोटो : VIKAS NAGAR