उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) के एक कर्मचारी का आवास आवंटन की अस्थाई वरिष्ठता सूची में पहला नंबर था। कर्मचारी को पूरा भरोसा था कि उनको आवास मिलेगा। लेकिन, आवास आवंटन समिति ने वरिष्ठता सूची को निरस्त कर दिया। यही नहीं आवास के लिए लिपिकीय संवर्ग को बदलकर अवर अभियंता या समकक्ष कर दिया। अब कर्मचारी ने आवास आवंटन न करने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
आशुलिपिक प्रदीप कुमार, लखवाड़ व्यासी परियोजना के महाप्रबंधक कार्यालय में तैनात हैं। यूजेवीएनएल के परियोजना वितरण खंड डाकपत्थर के अधिशासी अभियंता और आवास आवंटन समिति के सचिव को लिखे पत्र में प्रदीप कुमार ने बताया कि टोंस कॉलोनी में आवास संख्या बी 93 को लेकर आवंटन समिति ने 26 दिसंबर 2023 को अस्थाई वरिष्ठता सूची जारी की थी। इसमें उनकी वरिष्ठता पहले स्थान पर अंकित थी। दो जनवरी को समिति ने अस्थाई वरिष्ठता सूची को निरस्त कर दिया।
उन्होंने बताया कि आवास लिपिकीय संवर्ग था, लेकिन संवर्ग बदलकर अवर अभियंता या समकक्ष कर दिया गया। आरोप लगाया कि लिपिकीय संवर्ग में होने के कारण का नुकसान उनको उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि विषय पर निगम प्रबंधन ने न्याय संगत निर्णय नहीं लिया गया तो वह आंदोलन को बाध्य होंगे।
2168 आवास, 400 कर्मचारी, कई पर कब्जों का आरोप
ऊर्जा कामगार संगठन के केंद्रीय उप मंत्री विशाल गुप्ता ने बताया कि परियोजना क्षेत्र की डाकपत्थर से कुल्हाल तक विभिन्न कॉलोनियों में 2168 आवास हैं। बताया कि निगम के 400 कर्मचारी हैं और सिंचाई विभाग के करीब 200 कर्मचारी आवासों में रह रहे हैं। करीब 1568 आवास शेष रह जाते हैं, लेकिन कर्मचारियों को आवास नहीं मिल रहे हैं। आरोप लगाया कि मिनिस्टीरियल कर्मचारियों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। अगर यह जारी रहा तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
केंद्रीय उप मंत्री ने आरोप लगाया कि कई आवासों पर कब्जे हो रखें है। वहीं, किसी कर्मचारी को दो-दो आवास आवंटित कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि खुफिया विभाग से आवासों की जांच होनी चाहिए। कहा कि आशुलिपिक प्रदीप कुमार वर्तमान लिपिकों में वरिष्ठता सूची में हैं। उनको आवास का आवंटन लगभग तय था। बताया कि यूजेवीएनएल के परियोजना सचिव शंकर सिंह के संज्ञान में पूरा मामला है। बताया कि संगठन के केंद्रीय प्रचार मंत्री यतिन सिंह धीमान को भी मामले की जानकारी दी गई है।
ग्रेड पे के अनुसार आवास की श्रेणी का निर्धारण और आवंटन किया जाता है। आवास आवंटन समिति के सचिव ने प्रकरण डीजीएम को भेज दिया है। डीजीएम मामले की जांच के बाद प्रकरण पर निर्णय करेंगे।
विमल डबराल, पीआरओ, यूजेवीएनएल