इस दौरान बाबा रामदेव ने कहा सुप्रीम कोर्ट से फैसला जब आयेगा तब आ जाएगा, उससे पहले यूपी के सभी सांसद एकजुट होकर निजी बिल लेकर आये ताकि अयोध्या में राम मंदिर बने। संसद में इसका विरोध हो सकता है, विपक्ष हो सकता है। लेकिन राम का कोई विपक्ष नहीं है।
आचार्य बालकृष्ण ने अपने संबोधन में कहा कि एक ही मंच पर आज दो योगी हैं। यह हमारा सौभाग्य है। शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि योग, वेद और संस्कृत उत्तराखंड के सभी विश्वविद्यालयों में अनिवार्य होगी। इसके साथ ही गढ़वाली और कुमाउनी भाषा के लिए सेंटर भी खोले जाएंगे। साथ ही माध्यमिक शिक्षकों की तरह, हायर एजुकेशन के शिक्षक भी सम्मानित होंगे।
यूजीसी के चैयरमैन प्रो डीपी सिंह ने कहा कि वह शोध को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहे हैं। सभी विवि को अपने स्तर से शोध के विषय चुनकर शोध कराना होगा। इस दौरान उन्होंने हिमालयन परिक्षेत्र के सभी 140 विवि को मिलाकर शोध की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया।
एबीवीपी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुनील ने कहा कि हमे रिसर्च के क्षेत्र में काम करना होगा। कब तक हम पुरानी रिसर्च जनरल को देखते रहेंगे। हमारे आईआईटी जैसे संस्थानों को विश्व स्तर के रिसर्च जनरल निकलने चाहिए। कहा कि सीबीसीएस सिस्टम को जल्दबाजी में लागू किया गया है। इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की आवश्यकता है। इसके लिए संगठन स्तर पर आंदोलन चलाया जा रहा है।
इग्नू के कुलपति डॉ नागेश्वर राव ने कहा कि हमें अपनी उच्च शिक्षा नीति में कई बदलाव करने की जरूरत है। ट्रिपल आईटी धारवाड़ के निदेशक प्रो कवि महेश ने कहा कि हमें तकनीकी पाठ्यक्रम के साथ ही शास्त्र के शार्ट टर्म कोर्स संचालित करने की जरूरत है।
दिल्ली के पास 1000 एकड़ भूमि पर पतंजलि विश्व स्तर का विश्वविद्यालय बनाएगा। इसके लिए भूमि खरीद ली गई है।कहा कि मेरी कोई जन्मपत्री नहीं है, मैं कर्मपत्री पर विश्वास रखता हूं। भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय शिक्षा बोर्ड की स्थापना सरकार करेगी। सत्र की अध्यक्षता करते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा किसी भी भेदभाव से ऊपर है। पतंजलि में महिला, पुरुष, ब्राह्मण, क्षत्रीय, वैश्य, शूद्र सभी को वेद पुराण की समान शिक्षा दी जाती है।
शुरू हुआ ज्ञान कुंभ के दूसरे दिन का पहला सत्र। बाबा रामदेव समेत कई दिग्गज मौजूद। 'उच्च शिक्षा एवं भारतीय ज्ञान परंपरा' विषय पर सत्र में चर्चा हुई। पतंजलि योगपीठ में शुरू हुए ज्ञानकुंभ में देश भर से आए शिक्षाविदों और स्थानीय बच्चों में भारी उत्साह देखने को मिला। आज दूसरे दिन यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ दो दिवसीय ज्ञान कुंभ के समापन कार्यक्रम में शामिल होंगे।
बता दें कि पतंजलि के विशालतम परिसर में हो रहे ज्ञानकुंभ को लेकर कई शिक्षाविदों से बात की गई तो उनका कहना था कि देश में पहली बार हो रहा यह आयोजन अद्भुत है। निश्चित ही योग की धरती पर होने वाले इस ज्ञानकुंभ से ज्ञान का अमृत छलकेगा और शिक्षा व्यवस्था बेहतर होगी।
कर्नाटक की दावनगिर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एसवी हलसे ने कहा कि शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए यह आयोजन काफी कारगर साबित होगा। ऐसा पहली बार हो रहा है जब इतनी बड़ी संख्या में शिक्षाविद जुट रहे हैं। निश्चित ही स्वामी रामदेव के सानिध्य में हो रहे इस ज्ञानकुंभ में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर बेहतर सुझाव आएंगे।
बेंगलूरू विश्वविद्यालय से आए प्रोफेसर नरसिंहा मूर्ति ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में देश ने काफी प्रगति की है। इसके बाद भी सुधार की गुजाइंश काफी है। जब तक हम प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर सुधार नहीं करेंगे तो उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार बहुत ज्यादा नहीं हो सकेगा। उन्होंने कहा इस आयोजन से बेहतरी की उम्मीद की जा सकती है।
बेंगलूरू से ही आए प्रोफेसर मुन्नी नारायण मप्पा भी इस ज्ञानकुंभ को लेकर काफी उत्साहित दिखे। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन होते रहने चाहिए। प्रोफेसर डी वेंकटेश ने कहा कि उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुधारकर देश के लिए सुशिक्षित भावी पीढ़ी तैयार की जा सकती है।
हालांकि हमारा देश इस दिशा में लगातार प्रगति कर रहा है लेकिन बेहतरी के लिए अच्छे प्रयास किए जाने चाहिए। आसपास के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से छात्र छात्राएं भी इस ज्ञानकुंभ का हिस्सा बनने पतंजलि पहुंचे। एचईसी पीजी कालेज से आए विकास कुमार, खुशबू, अरसी निगार, दीपाली और प्रतिमा आदि का कहना था विद्वानों से मिलकर ज्यादा कुछ सीखने की ललक पैदा हुई है।