गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में गुरु पूर्णिमा पर्व समूह साधना और सद्गुरु द्वारा बताये सूत्रों को पालन करने की शपथ के साथ मनाया गया। इस वर्ष लॉकडाउन के कारण शांतिकुंज परिवार ने पर्व पूजन का कार्यक्रम भावनात्मक रूप से सम्पन्न किया। गायत्री परिवार प्रमुख ने वीडियो संदेश दिए। आनलाइन गुरु पूर्णिमा पूजन को यूट्यूब, फेसबुक, जूम सहित अनेक सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से प्रसारित किया गया। इस अवसर पर भारत सहित सौ से अधिक देशों के लाखों गायत्री साधकों ने भाग लिया। डॉ. प्रणव पंड्या ने कहा कि गुरु ज्ञानवान, विवेकशील एवं भावनाओं से परिपूर्ण होता है। संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी ने गुरु को भाव संवेदना की मूर्ति बताया और कहा कि गुरु पूर्णिमा आत्म मूल्यांकन का महापर्व है। इस अवसर पर गायत्री परिवार प्रमुख ने त्रिफला पर लिखी विशेष पुस्तक सहित शांतिकुंज पंचांग-202 का विमोचन किया।
गुरु की कृपा से जीवन हो जाता है भवसागर पार: कौशिक
उत्तरी हरिद्वार में हरिहर पुरुषोत्तम धाम में परमाध्यक्ष महंत कमलदास महाराज के नेतृत्व में आयोजित गुरु पूर्णिमा पूजन कार्यक्रम में शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने संत महात्माओं के बीच पहुंचकर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि हरिहर पुरुषोत्तम धाम के महंत कमलदास महाराज बड़े ही समाजसेवी संत हैं। महंत कमलदास महाराज ने कहा कि मनुष्य का जीवन बिना गुरु के अंधकार में होता है गुरु ही अंधकार से उजाले की ओर ले जाने की क्षमता रखते हैं। गुरु से मिले दिव्य मंत्र का जप और मनन सदा करते रहना चाहिए। महामंडलेश्वर हरिचेतनानंद महाराज और बड़ा अखाड़ा उदासीन के महंत जयेंद्र मुनि ने कहा कि सच्चे गुरु का सानिध्य, उनकी कृपा और आशीर्वाद पाने के लिए पहले सुपात्र बनें क्योंकि यदि आपके पात्र में जरा सा भी छेद है तो गुरु से मिले अमृत ज्ञान को आप खो देंगे। इस मौके पर महंत दुर्गादास कोठारी, महंत दामोदर दास, महंत राकेश, राघवेंद्र दास, महंत निरंजन दास, महंत केसवानंद, महंत प्रेमानंद, नरेश शर्मा आदि शामिल हुए।
गुरु शिष्य का मिलन दैवीय योजना से ही संभव: राजेंद्रानंद
भीमगोड़ा स्थित बिश्नोई आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी राजेंद्रानंद महाराज के सानिध्य में गुरु पूर्णिमा पर्व मनाते हुए गुरुओं की पूजा की गई। स्वामी राजेंद्रानंद महाराज ने कहा कि गुरु शिष्य का मिलन दैवीय योजना से ही संभव है। सद्गुरु अपने शिष्य की पात्रता को विकसित करने के साथ उसके जीवन के अधूरेपन को दूर करने का कार्य करता है। इस मौके पर स्वामी प्रणवानंद, आचार्य सत्यदेवनंद, बिशनोई सभा के अध्यक्ष कर्मवीर बिश्नोई, उपाध्यक्ष धर्मेंद्र बिश्नोई, पंकज बिश्नोई, अमृतानंद, गोविंद शर्णानंद, जयानंद, सुदर्शन आनंद, विस्वात्मानंद, अखिलेश मुनि, क्रष्णदास, राजीव बिश्नोई, मंजीत बिश्नोई, प्रदीप बिश्नोई आदि शामिल हुए। वहीं दूसरी ओर मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष व निरंजनी अखाड़ा के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने गुरु पूर्णिमा पर्व पर चरणपादुका मंदिर में पूजा अर्चना की। इस मौके पर निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रामरतन गिरी, महंत आलोक गिरी, स्वामी राजपुरी, धनजंय गिरी, मनसा देवी मंदिर की ट्रस्टी बिंदु गिरी, डॉ. सुनील कुमार बत्रा, गुलशन, प्रतीक सूरी, सुंदर राठौर आदि शामिल हुए।
भूपतवाला स्थित हरिधाम सनातन सेवा ट्रस्ट आश्रम में गुरु पूजन करते हुए आनंद पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरी महाराज ने कहा कि गुरु के प्रति समर्पण को दर्शाने वाला गुरु पूर्णिमा का पर्व भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है। उन्होंने कहा कि गुरु वह पारस है जो शिष्य के जीवन से अंधकार को दूर कर उसका जीवन ज्ञान रूपी प्रकाश से प्रकाशित कर देते हैं। चेतन ज्योति आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी ऋषिश्वरानंद महाराज, श्री थानाराम आश्रम के परमाध्यक्ष पूर्व पालिका अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि गुरु ही व्यक्ति का सच्चा मार्गदर्शक है। जगन्नाथ धाम के परमाध्यक्ष महंत अरुण दास महाराज ने गुरु पर्व का महत्व बताते हुए कहा कि गुरु ही ज्ञान का भंडार है। ब्रह्मलीन स्वामी हंसदेवाचार्य महाराज का स्मरण पूजन किया।
गुरु ही शिष्य के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं: कैलाशानंद
हरिद्वार। गुरु पूर्णिमा शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक, मेरठ की मेयर सुनीता वर्मा आदि ने श्री दक्षिण काली मंदिर पहुंचकर महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज से आशीर्वाद लिया। स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि गुरु व शिष्य का संबंध अटूट होता है। परंपराओं का निर्वहन हिंदू संस्कृति को दर्शाने का सशक्त माध्यम है। गुरु बिना ज्ञान की प्राप्ति नहीं की जा सकती है। इस मौके पर आरएसएस के क्षेत्र प्रचार प्रमुख पदम, पूर्व संगठन मंत्री राकेश जैन, वीर प्रताप, विस्तारक मनोज, शमा प्रवीण, ब्राह्मण सभा के पूर्व अध्यक्ष नितिन शर्मा, नितिन चौहान, शैलेंद्र पंवार, अंकुश शुक्ला, आचार्य पवन दत्त मिश्र, स्वामी विवेकानंद ब्रह्मचारी, पंडित प्रमोद पांडे, सागर ओझा, बालमुकुंदानंद ब्रह्मचारी आदि उपस्थित रहे। प्राचीन अवधूत मंडल आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी रुपेंद्र प्रकाश महाराज ने अपने गुरु महंत हंस प्रकाश महाराज की पूजा अर्चना की। वहीं, श्री गरीबदासीय धर्मशाला सेवाश्रम के महंत स्वामी रविदेव शास्त्री महाराज आदि संतों ने ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर डॉ. श्याम सुंदर दास की प्रतिमा की पूजा की। इस मौके पर स्वामी हरिहरानंद महाराज, महंत दिनेश दास, डॉ पदम प्रकाश, संजय वर्मा, लोकनाथ, शिव शंकर पांडे, अनमोल वर्मा, गिरीश चंद्र वर्मा आदि ने पूजा की।