पर्यटन विकास परिषद की अधिकृत सूचना गाइड पढ़कर यदि आप चमोली जिले में पशुधारा प्रताप खोजेंगे तो नहीं मिलेगा। क्योंकि यहां इस नाम की कोई चीज नहीं है।
दरअसल, देश के अंतिम गांव माणा के पास स्थित एक मनमोहक झरना है, जिसका नाम है वसुधारा प्रपात, जिसे पर्यटन विकास परिषद की गाइड में पशुधारा प्रताप लिखा गया है।
पर्यटन विभाग की गाइड में ढेरों गलतियां
यह तो एक उदाहरण भर है। इस गाइड में इस तरह की तमाम गलतियां हैं। उत्तराखंड की सैर के लिए अधिकतर पर्यटक इसी गाइड की मदद लेते हैं। देश के विभिन्न शहरों में स्थित पर्यटन विभाग के प्रचार-प्रसार कार्यालयों में इसी गाइड को बांटा जा रहा है।
पर्यटन विकास परिषद ने पर्यटकों की सुविधा के लिए ‘चार धाम’ गाइड प्रकाशित की है। इसमें उत्तराखंड के चारों धामों के अलावा विभिन्न तीर्थ और पर्यटन स्थलों, वहां तक पहुंचने, रुकने आदि का विवरण है।
लाखों रूपए खर्च होते हैं हर साल
गाइड में तमाम गलतियों को लेकर परिषद में अंदरखाने सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि प्रत्येक साल लाखों रुपये खर्च कर गाइड छपवाई जाती है। ग्राउंड लेवल की जानकारी न होने से गाइड का प्रकाशन करने वाली कंपनी उसमें गलती करती है।
दिल्ली, मुंबई, जयपुर, अहमदाबाद आदि शहरों में स्थित विभाग के प्रचार कार्यालयों में यह सूचना गाइड भेजी गई है।
अधिकारियों का है कहना
परिषद के प्रचार-प्रसार अधिकारी विवेक चौहान ने बताया कि सूचना गाइड को अपडेट किया जा रहा है। डिमांड के अनुसार, सूचना गाइड का प्रकाशन कर विभिन्न प्रचार-प्रसार केंद्रों पर भेजा जाता है।
कर्मचारी संगठन गढ़वाल मंडल विकास निगम के अध्यक्ष पुरुषोत्तम पुरी का कहना है कि यह बजट के दुरुपयोग के साथ ही पर्यटकों को भ्रमित करने वाली बात है। ग्राउंड लेवल पर काम करने वाले जीएमवीएन-केएमवीएन को ही यह काम दिया जाना चाहिए।
गाइड में प्रमुख गलतियां
उत्तरकाशी से नचिकेता ताल का पैदल ट्रैक 131 किलोमीटर दिखाया गया है। जबकि यह दूरी बमुश्किल 30 किलोमीटर होगी।
उत्तरकाशी के लंका में स्थित जीएमवीएन का गेस्ट हाउस दो साल पहले जल गया था। सूचना गाइड में इसमें रहने की सुविधा बताई गई है।
केदारनाथ में आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त चोराबाड़ी झील को पर्यटन महकमा चोरबाटी बता रहा है।