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प्रशिक्षित गुरिल्लों ने किया सीएम आवास कूच, बैठे धरने पर

Sat, 24 Sep 2016 03:16 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
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धरने पर बैठे गुरिल्ला - फोटो : AmarUjala
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प्रशिक्षित गुरिल्लों को राजकीय सेवा में लेने, पेंशन और मृतक आश्रितों को मुआवजा देने की मांग पर एसएसबी प्रशिक्षित गुरिल्ला संगठन के सैकड़ों सदस्यों ने मुख्यमंत्री आवास कूच किया। लेकिन पुलिस ने उनको मसूरी डायवर्जन पर रोक लिया। इस दौरान उनकी पुलिस से तीखी नोकझोंक व धक्कामुक्की हुई और गुरिल्ले वहीं धरने पर बैठ गए।
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मौके पर पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट ललित नारायण मिश्रा ने शाम छह बजे उनकी मुख्यमंत्री से वार्ता कराने का आश्वासन दिया। लेकिन शाम को केवल चार लोगों को वार्ता के लिए ले जाने पर गुरिल्लों ने हंगामा शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस ने सैकड़ों गुरिल्लों को गिरफ्तार कर लिया।

शुक्रवार सुबह करीब दस बजे सैकड़ों की संख्या में गुरिल्ला कुठालगेट पहुंचे। यहां से वे मुख्यमंत्री आवास कूच के लिए निकले। लेकिन मसूरी डायवर्जन पर पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उनको रोक लिया।
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ये हैं मांगें
प्रदेश अध्यक्ष यदुवीर सिंह ने बताया कि संगठन के 45 साल तक के सदस्यों को राजकीय सेवा में लेने, 45 साल से अधिक के सदस्यों को पेंशन या एकमुश्त राशि देने और मृतक आश्रितों को उचित मुआवजा देने की मांग पर संगठन पिछले दस सालों से आंदोलन कर रहा है। पूर्व में सरकार ने पूर्व सैनिकों की भांति गुरिल्लों को उपनल के माध्यम से नौकरी देने की घोषणा की थी। लेकिन अब तक इसका कोई शासनादेश नहीं हुआ।

इसी के विरोध में उन्होंने 18 सितंबर से उत्तरकाशी की गंगा वैली व यमुना वैली से पदयात्रा शुरू की। कूच करने वालों में जगदीश्वर चौहान, स्वरूप सिंह तोमर, आनंद सिंह रावत, महावीर सिंह, रामेश्वरी जोशी, बानती रावत, मोहर सिंह राणा, यशपाल चौहान, चमनलाल, उदयानंद चमोली, जितेंद्र बिष्ट, धना देवी, पवना सेमवाल, मोहन सिंह भंडारी, विजय लक्ष्मी, केएल राणाकोटी, जितेंद्र उनियाल, बनमाला आदि मौजूद रहे।

घंटों लगा रहा जाम
मसूरी डायवर्जन पर गुरिल्लों को पुलिस के रोके जाने पर वहां जाम की स्थिति बन गई। देहरादून-मसूूूरी मार्ग पर दोनों ओर वाहनों की लंबी लाइन लग गई। घंटों तक यात्री जाम में फंसे रहे। सिटी मजिस्ट्रेट ललित नारायण मिश्रा और एसपी सिटी अजय सिंह ने गुरिल्लों को समझाकर उनकी वार्ता मुख्यमंत्री से कराने का आश्वासन दिया। तब जाकर वो सड़क किनारे धरने पर बैठे और जाम खुल सका।
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