अधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ दिन से दोनों फर्म के लेनदेन पर नजर रखी जा रही थी। ये इकाइयां बाहरी राज्यों से फर्जी कंपनियों के बिलों की आड़ में बोगस आईसीटी का लाभ लेकर जीएसटी की देयता को समायोजित कर रही थीं।
फर्म पिछले तीन वर्ष से फर्जी वे बिलों के जरिये टोल प्लाजा से पास दिखाकर माल की खरीद को सही दिखाने का प्रयास कर रहीं थीं। टीमों ने फर्म के दस्तावेज जांच के लिए कब्जे में ले लिए हैं। टीम में सहायक आयुक्त मनमोहन असवाल, टीकाराम चन्याल, सुरेंद्र राणा, हरिओम वर्मा, अशोक कुमार, असद अहमद, ईशा व मंजीत राणा आदि शामिल भी शामिल थे।