उत्तराखंड के विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में कॉमर्स के करीब 50 हजार छात्रों को जीएसटी अगले सत्र से पढ़ने को मिलेगी। गढ़वाल विश्वविद्यालय से लेकर श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय और कुमाऊं विवि व करीब 400 कॉलेजों में इस साल जीएसटी का जिक्र नहीं होगा।
पूरे सत्र में अप्रत्यक्ष करों के रूप में वह कर पढ़ाए जाएंगे जो कि अब अस्तित्व में ही नहीं रहे। विश्वविद्यालयों का कहना है कि चूंकि जीएसटी विलंब से आया है, इसलिए तुरंत सिलेबस में बदलाव नहीं किया जा सकता है। लिहाजा, फिलहाल छात्र कॉमर्स की पढ़ाई में वैल्यू एडेड टैक्स (वैट), एक्साइज ड्यूटी जैसे करों को ही पढ़ेंगे। हालांकि उनका कहना है कि जीएसटी कॉमर्स की पढ़ाई में सबसे अहम विषय है। उच्च शिक्षा निदेशक डा. बीसी मलकानी ने बताया कि जीएसटी को लेकर तैयारियां चल रही हैं लेकिन इस साल सिलेबस में जीएसटी आना मुश्किल है।
पहले टैक्स रहते थे, रिवाइज होते थे
बीकॉम व एमकॉम में पढ़ाए जा रहे अप्रत्यक्ष करों में टैक्स यूनिट अब पूरी तरह से आउटडेट हो चुकी है। इसमें वैट, सीएसटी, एक्साइज ड्यूटी, कस्टम ड्यूटी पढ़ाया जाता था। पहले केवल टैक्स रेट रिवाइज होते थे लेकिन टैक्स की प्रणाली वही रहती थी। इसलिए कोई परेशानी नहीं होती थी लेकिन अब यह सभी टैक्स पूरी तरह से खत्म हो गए हैं और एक देश, एक टैक्स लागू हो गया है।
सिलेबस में बदलाव के लिए पहले बोर्ड ऑफ स्टडीज में मामला रखा जाता है। इसके बाद एकेडमिक काउंसिल में जाता है। इसके बाद सिलेबस रिवाइज होता है। इस साल नया सत्र शुरू हो चुका है। जीएसटी की डिटेल्स के आधार पर अगले सत्र से जीएसटी को कोर्स का हिस्सा बनाया जाएगा।
- प्रो. जेएल कौल, कुलपति, गढ़वाल विश्वविद्यालय
नए सत्र का आगाज हो चुका है। सिलेबस में तत्काल परिवर्तन संभव नहीं है। हम जीएसटी के हिसाब से जल्द ही सिलेबस को रिवाइज करेंगे लेकिन फिलहाल सभी कॉलेजों के छात्रों को पुराने कर ही पढ़ने होंगे।
- डा. उदय सिंह रावत, कुलपति, श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय
हमारा सत्र शुरू हो चुका है। अभी जीएसटी की ज्यादा डिटेल्स आई भी नहीं हैं। इसलिए फिलहाल पुराने अप्रत्यक्ष कर ही पढ़ाए जाएंगे। दिसंबर 2017 से शुरू होने वाले सेमेस्टर में हम यह परिवर्तन लागू कर देंगे। इसके बाद जीएसटी पढ़ाया जाएगा।
- प्रो. नागेश्वर राव, कुलपति, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय