भारत और नेपाल के बीच परंपरागत कारोबार पर जीएसटी की मार पड़ी है। इससे दोनों देशों के मध्य न केवल माल एवं वस्तुओं के लेन देन में काफी कमी आई है बल्कि इससे होने वाली नेपाल की इनकम भी कम हो गई है। नेपाल के बाजारों में भारतीय सामान गायब होता जा रहा है।
पिछले वर्ष से भारत में जीएसटी लागू है। अब सीमा पार नेपाल में इसका प्रभाव दिखने लगा है। पड़ोसी देश सीमांत बैतड़ी जिले के जूलाघाट भंसार कार्यालय से पिछले वित्तीय वर्ष (2016-17) में सात महीनों के दौरान 37.50 लाख रुपये (भारतीय मुद्रा) का राजस्व मिला था।
इस वित्तीय वर्ष (2017-180 में अब तक मात्र 23.12 लाख रुपये (भारतीय मुद्रा) का ही राजस्व प्राप्त हुआ है। महाकाली भंसार कार्यालय जूलाघाट के प्रमुख दिली राम सुवेदी ने बताया कि इस वर्ष कस्टम से मिलने वाले राजस्व का लक्ष्य एक करोड़ रुपये (भारतीय मुद्रा)का है। इस लक्ष्य को पूरा कर पाना संभव नहीं है। उनका कहना है कि भारत से नेपाल को होने वाले आयात में भारी गिरावट आई है। व्यापारी टैक्स के दायरे से बचने के लिए कम सामान का आयात कर रहे हैं।
भारत के झूलाघाट, जौलजीबी, धारचूला, बलुवाकोट, ब्रह्मदेव और बनबसा की सीमाओं से नेपाल के क्षेत्र संख्या सात के नौ जिलों को खाद्य सामग्री, सब्जियां, चीनी, सीमेंट, कपड़ा और रेडीमेड कपड़े आदि का आयात किया जाता है। जीएसटी लागू होने के बाद बैतड़ी, दार्चुला, डडेलधूरा, कंचनपुर, अछाम, डोटी, बजांग, बाजुरा और कैलाली जिलों के बाजारों में भारतीय सामान कम दिखाई देने लगा है। इसके अलावा भारतीय बाजार में आने वाले नेपाल निर्मित सामान के निर्यात में भी कमी आ गई है।
व्यापारियों ने नहीं कराया आईजीएसटी का पंजीकरण
भारतीय व्यापारियों के अनुसार उन्होंने जीएसटी के अंतर्गत अपना पंजीकरण कराया है। दूसरे देश को सामान बेचने के लिए आईजीएसटी में पंजीकरण कराना जरूरी है। इसके पंजीकरण के लिए व्यापारियों को बाहर जाना पड़ता है। आईजीएसटी में उन्हें टैक्स भी ज्यादा देना पड़ता है। इससे भारत का सामान नेपाल के बाजारों में महंगा पड़ता है। इसके चलते व्यापारियों ने आईजीएसटी का पंजीकरण नहीं कराया है। ऐेसे में वह भारतीय सामान को नेपाल नहीं भेज पा रहे हैं।
घरेलू सामान पर कोई रोक नहीं
भारत से नेपाल को जाने वाले घरेलू सामान पर कोई रोक नहीं है, लेकिन व्यापार के लिए जाने वाले सामान पर भारतीय कस्टम विभाग सख्ती बरत रह है। इसके चलते बहुत ही कम मात्रा में भारतीय सामान नेपाल की ओर जा रहा है। ऐसे में भारतीय व्यापारियों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। नेपाल के जो व्यापारी भारतीय सामान के व्यापार पर निर्भर थे वह अब नए काम की तलाश में लग गए हैं।