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इस 'कुरुक्षेत्र' में लड़ा जाएगा नैनीताल का महासमर

Sat, 26 Apr 2014 09:40 AM IST
अजित सिंह राठी/अमर उजाला, ऊधमसिंहनगर
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तमाम धार्मिक व पर्यटन स्थलों को अपनी आगोश में समेटे नैनीताल संसदीय सीट का असली रणक्षेत्र जिला ऊधमसिंहनगर होगा। और तेजी से बदल रहे हालातों के बीच मुकाबला भी भाजपा के भगत सिंह कोश्यारी व कांग्रेस के केसी सिंह बाबा के बीच सिमटता दिख रहा है।
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बाबा का चुनावी रथ मुसलिम वोट व जिले से बड़े कांग्रेसी क्षत्रपों का सहारे आगे बढ़ रहा है। उधर, भगतदा पूरी तरह से मोदी लहर और अपने यूथ कमांडरों के सहारे चुनाव रण का शंखनाद कर रहे हैं।


नैनीताल जिले की पांच विधानसभा सीटों के अलावा इस संसदीय क्षेत्र में ऊधमसिंहनगर की नौ विधानसभा सीटें हैं।

बाबा की सादगी पर कांग्रेस का भरोसा

कांग्रेस के केसी सिंह बाबा को दो लाख से ज्यादा मुसलिम वोटों का सब्जबाग पाले हैं। नैनीताल में कैबिनेट मंत्री इंदिरा ह्दयेश, ऊधमसिंहनगर जिले में कैबिनेट मंत्री व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष यशपाल आर्य के अलावा पूर्व सीएम विजय बहुगुणा और पूर्व मंत्री तिलकराज बेहड़ जैसे दिग्गजों की फौज भी इसी संसदीय क्षेत्र में वास करती है।

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इनकी वजह से ही बाबा जीत के ख्वाब संजो रहे हैं लेकिन भीमताल से उनके गृह नगर काशीपुर तक जनता के बीच उनकी अनुपलब्धता बाधा बनी हुई है।

पिछली बार भी जनता ने इसी शर्त पर वोट किया था कि वह भविष्य में उपलब्ध रहेंगे। पांच साल बीते मगर जनता की शिकायत अभी भी मौजूं है।

पिछले इलेक्शन की जीत के पीछे उनकी सज्जनता व व्यवहार कुशलता रही। पूरे जिले में कांग्रेस से जुड़े ही ऐसे सैकड़ों लोग मिलते हैं जो बाबा के उपलब्ध नहीं रहने से नाराज तो है लेकिन उनकी सज्जनता के कायल भी हैं।

दिग्गज भगतदा का दावा भी है मजबूत

जमीनी पकड़ वाले स्वभाव से जिद्दी और भगतदा के नाम से मशहूर पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी का सूबे की सियासत में ऊंचा कद है। इस बात को वह राजनीति में कई बार साबित कर चुके है कि लक्ष्य का पीछा करना उनका शगल है।

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ऊधमसिंहनगर जिले में उनके सबसे विश्वासपात्र लेफ्टिनेंट खटीमा के युवा तुर्क विधायक पुष्कर सिंह धामी जीत के प्रति आश्वस्त है। पूर्व मंत्री प्रकाश पंत का आवागमन भी लगातार बना है। राजेश शुक्ला व प्रेमसिंह राणा जैसे यूथ एमएलए भी भगतदा के लिए डटे हैं।

कुल मिलाकर एक मुकाबला बाबा और भगतदा के बीच है तो एक जंग कांग्रेस के भारी भरकम क्षत्रपों व भगतदा के यूथ कमांडरों के बीच भी चल रही है।

इस सीट पर जातीय समीकरण

सबसे बड़े वोट बैंक मुसलिम के लिए कांग्रेस व बसपा के बीच खींचतान है। बसपा प्रत्याशी लईक अहमद किच्छा के रहने वाले है। किच्छा, काशीपुर, रुद्रपुर व हल्द्वानी सीट पर मुसलिम मत निर्णायक है।

लईक, दलित व मुसलिम मतों के सहारे मैदान में है। लेकिन मुसलिमों का काफी झुकाव कांग्रेस की तरफ दिख रहा है। इसलिए मुसलिम व दलित वोट के लिए कांग्रेस व बसपा के बीच भिड़ंत होगी। हालांकि रुद्रपुर क्षेत्र के दलित की पसंद बसपा के बजाय भाजपा व कांग्रेस है।

इस सीट पर पर्वतीय वोट 35 प्रतिशत के आस पास बताए जाते हैं। इनका बड़ा हिस्सा भाजपा को जाने की उम्मीद है। क्योंकि भाजपा से विजय बंसल लड़े हो या फिर बलराज पासी, नैनीताल में फायदा मिलता है। इसलिए इन वोटों के लिए भगतदा की टीम आश्वस्त है

सिख वोटर भी काफी हैं इस सीट पर

मार्शल कौम के रूप में मशहूर सिक्खों की आबादी जिले में 12 प्रतिशत से भी ज्यादा है। यह समुदाय भी जिले में किसी भी प्रत्याशी की किस्मत बदलने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। इसका फायदा भाजपा को मिल सकता है क्योंकि अकाली दल व भाजपा के बीच पिछले बीस साल से निर्विवाद रिश्ता रहा है।

ऊधमसिंहनगर में काशीपुर, किच्छा, नानकमत्ता व खटीमा समेत कई सीटों पर सरदारों का प्रभाव है। गदरपुर व बाजपुर क्षेत्र के सिक्खों में खासा प्रभाव रखने वाले राजेंद्रपाल सिंह ने मोर्चा संभाल रखा है।

पंजाबी बिरादरी भी बड़ा फैक्टर है। रुद्रपुर से लेकर काशीपुर और किच्छा तक इस समुदाय का खासा प्रभाव है। जिले में इस बिरादरी के बड़े नेता तिलकराज बेहड़ है।

इसका फायदा मिलने की उम्मीद बाबा को तो है लेकिन बेहड़ के समर्थक इस बात को नहीं भूले कि बाबा ने ही बेहड़ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।

काशीपुर में मेयर का चुनाव निर्दलीय जीती उषा चौधरी के भाजपा के साथ आने से सारा जाट वोट भाजपा में डायवर्ट होने का दावा किया जा रहा है।

उलझने भी बहुत हैं कांग्रेस में

केलाखेड़ा नगर पंचायत चेयरमैन मोहम्मद शफी अहमद अंसारी दमदार मुसलिम नेता है। वह कांग्रेस में आना तो चाहते है लेकिन प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य ने ब्रेक लगा दिया है।

उधर, कालाढूंगी से निर्दलीय विस चुनाव लड़े महेश शर्मा को आर्य कांग्रेस में लाना चाहते है लेकिन राष्ट्रीय सचिव व राहुल के करीबी माने जाने वाले प्रकाश जोशी ने अडंगा लगा दिया है।

तिलकराज बेहड़ बड़े नेता है लेकिन दो ढाई साल पहले सांसद केसी सिंह बाबा द्वारा उनके खिलाफ एक कार्यक्रम में हुए झगड़े को लेकर मुकदमा दर्ज करवाया गया था। वह खटास अभी ना तो गई और ना ही किसी बड़े नेता ने दूर करने की कोशिश की।

बेहड़ तो चुनाव प्रचार कर रहे है लेकिन उनके कैंप में अभी भी इस घटना को लेकर गुस्सा है जबकि पिछले लोकसभा चुनाव में रुद्रपुर विस से कांग्रेस की जीत का अंतर तेरह हजार था।
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इस बार बदले हैं इस सीट के हालात

नैनीताल संसदीय सीट से भाजपा भले ही पिछले विधानसभा चुनाव में 88 हजार वोटों से हारी हो लेकिन 2012 के विस चुनाव में सर्वाधिक आठ सीटों पर भाजपा विधायक जीते हैं।

बाद में सितारगंज से किरण मंडल के इस्तीफा देने से एक सीट कम हो गई। ये ज्यादातर विधायक ऊधमसिंहनगर से ही है।

इसलिए खटीमा से पुष्कर सिंह धामी, नानकमत्ता से प्रेम सिंह राणा, किच्छा से राजेश शुक्ला, गदरपुर से अरविंद पांडे, काशीपुर से हरभजन सिंह चीमा की भी परीक्षा होनी है।
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