हालांकि, अनुदान का भार सरकार पर नहीं पड़ेगा। इसके लिए सरकार की ओर से ‘उत्तराखंड क्लीन मोबिलिटी ट्रांजेशन फंड’ बनाया जा रहा है। इसमें विभिन्न स्रोतों से प्राप्त राशि फंड के रूप में जमा की जाएगी। इस फंड का उपयोग अनुदान राशि वितरित करने में होगा।
परिवहन सचिव अरविंद सिंह ह्यांकी ने बताया कि राज्य में पहले ही वाहनों के पंजीकरण के समय ग्रीन सेस लिया जाता है। अब बाहर से आने वाले डीजल वाहनों से फास्टैग के माध्यम से ग्रीन एंट्री सेस वसूल किया जाएगा। ग्रीन सेस और ग्रीन एंट्री सेस से अनुदान राशि का वितरण करने की योजना है। प्रोत्साहन राशि में जितनी भी धनराशि कम पड़ेगी, वह राज्य सरकार उपलब्ध कराएगी।