बैसाखी पर्व पर इस बार 67 वर्ष बाद दुर्लभ संयोग बन रहा है। वर्ष के राजा शनि के साथ इस दिन से मंत्री के स्थान पर मंगल प्रवेश करेंगे।
मंगल और शनि को परस्पर स्नेही माना जाता है। खास बात यह है कि बैसाखी पर पुण्यकाल 16 घड़ी पहले प्रारंभ हो जाएगा और 16 घड़ी बाद तक रहेगा। इससे लोग दिनभर दान पूजन का लाभ ले सकेंगे।
विभिन्न राशियों पर इसके अलग-अलग प्रभाव होंगे। 14 अप्रैल को बैसाखी का पर्व है। इस दिन सूर्य मीन से मेष राशि पर प्रवेश करेगा। सूर्य संक्रमण दोपहर 1.35 बजे होगा। सूर्य के प्रवेश से सोलह घड़ी पहले ही पुण्यकाल शुरू हो जाएगा। पुण्यकाल की शुरुआत सुबह 7.10 मिनट पर होगी।
मंगल मंत्री रहने पर वर्षा होती है अधिक
इस बार वर्ष के राजा शनि और मंत्री मंगल हैं। वर्ष 1948 में भी यही स्थिति बनी थी, जबकि यही दोनों राजा और मंत्री थे। सूर्य संक्रमण का प्रभाव सभी राशियों पर मिला जुला रहेगा, हालांकि मेष, वृष, कर्क, सिंह, धनु, मकर राशि के लिए बेहद शुभ माना जा रहा है।
उत्तराखंड विद्वत सभा के उपाध्यक्ष आचार्य भरतराम तिवारी ने बताया कि मंगल मंत्री रहने पर वर्षा अधिक होती है। बताया कि बैसाखी के दिन सूर्य उपासना की जाती है।
आचार्य पवन कुमार शर्मा ने बताया कि बैसाखी के दिन भगवान विष्णु का भी पूजन किया जाता है। डॉ. आचार्य सुशांत राज ने बताया कि बैसाखी के मौके पर तीर्थ स्थलों पर स्नान, दान आदि करना बेहद शुभ होता है।