हालांकि, सचिव वित्त फिलहाल किसी भी वित्तीय नुकसान से इन्कार कर रहे हैं, लेकिन सूत्रों का मानना है कि स्थितियां सामान्य होने के बाद ही पता चल पाएगा कि वास्तव में कितना और क्या नुकसान हुआ। बता दें कि आईएफएमएस वित्त विभाग का एक महत्वपूर्ण पोर्टल है, जिससे कर्मचारियों के वेतन और अन्य सेवाओं का संचालन होता है।
तकनीकी संकट गहराने से पिछले चार दिन से राज्यकर्मियों और पेंशनरों को किसी भी तरह की एसएमएस सेवा प्राप्त नहीं हो रही है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, बिलों, रायल्टी, करों, जीएसटी व अन्य से प्रतिदिन प्राप्त होने वाला राजस्व भी अभी कोषागारों में नहीं पहुंच पा रहा है। लेनदेन की यह व्यवस्था तब तक ठप रहेगी, जब तक स्टेट डाटा सेंटर साइबर हमले से नहीं उबर जाता है।
तो डेढ़ लाख कर्मचारियों का वेतन अटक जाता
वित्त विभाग के लिए सुकून की बात यह है कि साइबर हमला तीन अक्तूबर को हुआ। यदि वह दो दिन पहले होता तो राज्य के करीब डेढ़ लाख राज्य कर्मचारियों का वेतन लटक जाता। सचिव वित्त के मुताबिक, कर्मचारियों का वेतन पहले ही जारी हो चुका है। वित्त विभाग ने तीन अक्तूबर तक सभी कर्मचारियों की वेतन जारी कर दिया था।
मालवेयर की नहीं हुई पहचान
स्टेट डाटा सेंटर में मालवेयर के कारण सभी विभागों की वेबसाइट बंद हो गई थी, लेकिन चार दिन बाद भी मालवेयर की पहचान नहीं हो पाई है। साइबर हमला कहां से हुआ, यह भी अभी तक पता नहीं चल रहा है। केंद्रीय एजेंसी संग ही केंद्र व राज्य के विशेषज्ञ पता करने में जुटे हैं। इसके साथ ही सभी वेबसाइट शुरू नहीं हो पाई है। सरकार का दावा है कि सोमवार तक सभी वेबसाइट शुरू हो जाएंगी।
वैट में पेट्रोल-डीजल टैक्स के लिए ऑफलाइन व्यवस्था
साइबर हमले से जीएसटी का काम पर कोई असर नहीं पड़ा है। जीएसटी केंद्र सरकार की वेबसाइट से चलती है, लेकिन वैट प्रणाली में पेट्रोल-डीजल से प्राप्त होने वाला टैक्स का काम प्रभावित है। जब तब वेबसाइट शुरू नहीं हो जाती, इसके लिए राज्य कर विभाग फार्म-16 भरने के लिए ऑफलाइन व्यवस्था शुरू की है।