देहरादून। राज्य सरकार धौलीगंगा आपदा के कारणों का विस्तृत अध्ययन कराएगी। अमर उजाला की ओर से सोमवार को आयोजित वेबिनार में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसरो की सैटेलाइट इमेज के आधार पर बर्फ का पहाड़ खिसकने को घटना का कारण बताया है। बर्फ खिसकने की यह घटना क्यों और कैसे हुई, इसकी पड़ताल कराई जाएगी।
अमर उजाला वेबिनार में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने पूरी घटना और इसके बाद हुए एक्शन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रविवार सुबह लगभग 10:30 बजे सरकार को जोशीमठ क्षेत्र में आपदा की सूचना मिली। तुरंत मुख्य सचिव और जिलाधिकारियों से बातचीत की गई। पहली सूचना यही मिली कि वहां नदी में उफान आ गया है। इससे धौलीगंगा प्रोजेक्ट और कई पुल बह गए हैं। वहां जो लोग काम कर रहे थे, उनमें से ज्यादातर लापता हैं। हमने तुरंत जोशीमठ से स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एसडीआरएफ) की टीम को मौके के लिए रवाना किया। केंद्र सरकार को भी मामले की जानकारी दी। इस पर वहां से भी एनडीआरएफ की टीम भेज दी गई। आईटीबीपी की टीम भी तुरंत रेस्क्यू अभियान में जुट गई। चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, टिहरी, हरिद्वार और देहरादून के तटवर्ती क्षेत्रों को तुरंत अलर्ट किया गया। जिन इलाकों को खाली करने की जरूरत थी, वहां से लोगों को हटाया गया।
उन्होंने बताया कि टनल में फंसे कई लोगों को सुरक्षित बचाया गया। अभी कई जगह लोग फंसे हो सकते हैं, जिन्हें निकालने का काम चल रहा है। इसके चलते अगले एक-दो दिन में मृतकों की संख्या बढ़ भी सकती है। उन्होंने बताया कि अभी भी पानी खतरे के निशान के ऊपर है। इस पूरे मामले में सरकार ने बेहद तत्परता दिखाई है। जिन परिवारों ने अपने किसी सदस्य को खोया है, हमारी संवेदना उनके साथ है। सरकार सभी प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है। अभी राज्य सरकार इस पूरे मामले का विस्तृत अध्ययन करेगी। इसके आधार पर इसके कारणों की पड़ताल होगी। उन्होंने कहा कि पहाड़ में पर्यावरण की चिंता होनी चाहिए, लेकिन नागरिक सुविधाएं भी बेहद जरूरी है। अभी कर्णप्रयाग तक ट्रेन जा रही है। ऑलवेदर रोड बन रही है। इसके अलावा तमाम बड़ी विकास योजनाओं पर काम हो रहा है। हम पहाड़ को पीछे नहीं छोड़ नहीं सकते। वहां के लोगों के लिए सुविधाएं जुटाना, रोजगार के अवसर पैदा करना, विकास कार्य करना भी सरकार की जिम्मेदारी है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह लगातार मामले की जानकारी लेते रहे। वेबिनार में वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के निदेशक कालाचांद साईं और उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के निदेशक प्रो. एमपीएस बिष्ट भी मौजूद रहे।