अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। जन प्रहार संगठन ने प्रेस वार्ता कर मांग की है कि ऊर्जा निगमों में एमडी की अर्हता को लेकर कैबिनेट में जो फैसला लिया गया है, सरकार उसे तत्काल वापस ले।
उच्च न्यायालय में चल रहे इस मामले में पक्षकार दीप्ति पोखरियाल ने कहा कि उन्होंने उच्च न्यायालय के 18 फरवरी के निर्णय सरकार के न मानने के खिलाफ हाईकोर्ट में अवमानना का मुकदमा दाखिल किया है। जन प्रहार की संयोजक सुजाता पॉल ने कहा कि यह बहुत चौंकाने वाला है कि उच्च न्यायालय का निर्णय आने के बाद भी मुख्यमंत्री एवं सरकार कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर पिटकुल प्रभारी एमडी पीसी ध्यानी को बचा रही है। उस प्रस्ताव को अभी तक सार्वजनिक किया नहीं गया है।
सहसंयोजक पंकज सिंह क्षेत्री ने कहा कि यह बहुत दुखद है कि एक अधिकारी को बचाने के लिए पूरा सरकारी सिस्टम नियम कानून को भी ताक पर रखने में गुरेज नहीं कर रहा। उन्होंने मांग की कि एमडी पद की तकनीकी अर्हता के बजाए गैर तकनीकी अर्हता को भी शामिल करने के फैसले को सरकार तुरंत वापस ले। भविष्य में किसी भी संवेदनशील पद पर नियुक्ति के लिए पारदर्शी और मेरिट आधारित प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।