जनपद हरिद्वार में 98 प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल के भवन बैठने लायक नहीं है। इन स्कूलों के भवन जर्जर हो चुके हैं। यह स्कूल कभी भी हादसे का सबब बन सकते हैं। विभाग ने इन स्कूलों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी है। आठ स्कूलों के जर्जर भवनों के संबंध में तो रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी भी जा चुकी है। जल्द ही उनके ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हो सकती है।
बरसात का मौसम है। बारिश हो रही हो रही है। ऐसे में जर्जर भवनों पर खतरा मंडराने लगा है। जर्जर भवनों में सरकारी स्कूलों के भवन भी बड़ी संख्या में है। जनपद हरिद्वार में राजकीय प्राथमिक और राजकीय जूनियर हाईस्कूलों की संख्या 795 हैं जिसमें 676 स्कूल प्राथमिक और 119 स्कूल जूनियर हाईस्कूल है। इन भवनों में से विभाग ने ही खुद 98 स्कूलों को जर्जर की श्रेणी में रखा हुआ है। जिसमें से आठ स्कूलों की हालत बेहद खराब है।
इन आठ स्कूलों को ध्वस्त कराए जाने के लिए विभाग की ओर से उनके ध्वस्तीकरण की सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। अब आठ स्कूलों के ध्वस्तीकरण के लिए शासन के आदेश का इंतजार है। इन आठ स्कूलों के अलावा 90 स्कूलों की सूची शिक्षा विभाग ग्रामीण निर्माण विभाग को सौंप चुका है। इस विभाग की ओर से इन 90 स्कूलों के जर्जर होने का प्रमाण-पत्र दिया जाना है।
जिसके बाद इन स्कूलों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी, लेकिन विभाग की यह औपचारिकताएं कब तक पूरी होंगी, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। विभाग की ओर से जर्जर बताए जा रहे इन भवनों में प्रतिदिन बच्चे पढ़ रहे हैं। बारिश का सिलसिला थम नहीं रहा है। ऐसे में यदि किसी स्कूल का भवन, स्कूल समय में गिर जाता है तो इस हादसे के लिए कौन जिम्मेदार होगा। इसका जवाब किसी भी अधिकारी के पास नहीं है।
जिन स्कूलों के भवन जर्जर हालत में है। उनकी सूची तैयार कर ग्रामीण निर्माण विभाग को सौंपी जा चुकी है। वह उन स्कूलों की सर्वे कर रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। ग्रामीण निर्माण विभाग की ओर से इस संबंध में प्रमाण-पत्र दिया जाएगा। इसके बाद जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण के लिए प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
- ब्रहमपाल सिंह सैनी, जिला शिक्षा अधिकारी, हरिद्वार
लक्सर में भी जर्जर स्कूल भवन जर्जर
लक्सर तहसील में प्राथमिक शिक्षा का बुरा हाल है। करीब आधा दर्जन विद्यालयों के भवनों की हालत खस्ता व जर्जर है। कई जगह दूसरे सरकारी भवनों में बैठकर बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। पढ़ेगा भारत, आगे बढ़ेगा भारत का केंद्र सरकार का सपना कैसे पूरा होगा। जब देहात की शिक्षा व्यवस्था ही सही ढंग से ढर्रे पर नहीं है। लक्सर तहसील की बात करे तो यहां आधा दर्जन विद्यालयों की हालत बद से बद्तर है। कई स्कूलों की बिल्डिंग अंतिम सांस गिन रही है, तो कई के पास बिल्डिंग ही नहीं है। लक्सर तहसील के ब्लाक के दरगाहपुर में स्कूली बिल्डिंग बेहद जर्जर हाल में है। जगह-जगह से प्लास्टर उखड़ने के बाद दीवारें झुक गई है तथा बरसात में कई जगह से छत टपक रही है, भवन के कभी भी धराशायी होने का खतरा बना हुआ है।
रामपुर रायघटी के भवन की भी कमोबेश ऐसी ही स्थिति है। यहां भी सैकड़ों बच्चों का जीवन पल-पल खतरे में है। इसी ब्लॉक के लादपुर खुर्द गांव की स्थिति तो इनसे भी बुरी है यहां स्कूल का सरकारी भवन काफी समय पहले ध्वस्त हो गया था। भवन ध्वस्त होने के बाद से आज तक विभाग द्वारा भवन बनाने के लिए कोई ठोस प्रयास किया नहीं किया गया, जबकि स्कूल गांव के ही एक ग्रामीण की बैठक में संचालित हो रहा है वहां पर भी शिक्षकों को स्कूल संचालित करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसी प्रकार खानपुर ब्लॉक में भी शिक्षा व्यवस्था राम भरोसे ही नजर आती है। यहां भी कई विद्यालयों के भवनों का बुरा हाल है।
खानपुर ब्लाक के नाईवाला वाला गांव में बिल्डिंग गिरने की स्थिति में है। जिसके चलते स्कूली बच्चे व शिक्षक यहां खतरा मोल लेकर पढ़ और पढ़ा रहे हैं । कमोबेश ऐसे ही हालात ब्लॉक के बालचंद वाला गांव के स्कूल के हैं । यहां स्कूल का भवन तो काफी समय पहले धराशाई हो गया था पर शिक्षकों द्वारा ग्राम प्रधान के रहमोकरम पर पंचायत भवन के कमरे में अस्थायी रूप से स्कूल का संचालन किया जा रहा है। इन हालातों के बाद भी शिक्षा विभाग के अधिकारी शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बताने में परहेज नहीं कर रहे हैं। पटरी से उतरी शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने की बाबत क्षेत्र के जागरूक लोग शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कई बार पत्र भेज चुके है लेकिन कार्रवाई के नाम पर सब शून्य नजर आता है।
उधार के भवनों में चल रहे स्कूल
मंगलौर नगर क्षेत्र के सरकारी प्राथमिक स्कूलों के भवनों की हालत सुधरने का नाम नहीं ले रही है। भवनों की कमी का आलम यह हैं कि एक परिसर में कई-कई स्कूल संचालित किए जा रहे है। स्कूलों में बरसात के दौरान पानी भर जाता है। नगर के कुल 13 स्कूलों में से एक को काफी साल पहले बंद कर दिया गया था। बचे हुए 12 स्कूलों में से चार स्कूलों के किराये के भवन जर्जर हो जाने के कारण खाली कर दिए गए। अब जूनियर हाईस्कूल किला के परिसर में दो प्राथमिक स्कूल भी संचालित किए जा रहे है। ऐसी ही स्थिति मानक चौक के राजकीय कन्या हाईस्कूल की है। यहां भी दो प्राइमरी स्कूलों के अलावा एक महाविद्यालय भी संचालित हो रहा है। मोहल्ला किला में ही एक ही परिसर तीन स्कूल संचालित हो रहे है। अब केवल एक ही प्राइमरी स्कूल किराये के भवन में चल रहा हैं । इसमे केवल एक ही कमरा थोड़ा बहुत बैठने लायक है। उसी में सारे बच्चे बैठ रहे है।
बरसात के दिनों में टपकटती है स्कूलों की छतें
बुग्गावाला में दौड़बसी गांव के राजकीय प्राथमिक विद्यालय के भवन की हालत जर्जर हो चुकी है। बारिश के समय अध्यापक बच्चों को पड़ोस के लोगों के घरों में पढ़ाने को विवश हैं। जिससे अभिभावकों में शासन प्रशासन के खिलाफ रोष पनप रहा है। बुग्गावाला क्षेत्र के गांव दौड़बसी के राजकीय प्राथमिक विद्यालय के भवन की हालत इतनी खस्ता हो गई है कि छत की निचली परत टूट कर नीचे गिरने लग गयी है और छत का सरिया भी दिखने लगा है। भवन अधिक पुराना होने के कारण बरसात के दिनों में बरसाती पानी रिसने लगा है। जिस कारण बच्चे पड़ोस के लोगों के घरों में पढ़ने को विवश हैं। प्रधानाचार्य हरीश बहुगुणा ने बताया कि कई बार विधायक और अधिकारियों को लिखित शिकायत कर चुके है। लेकिन किसी ने भी इस और ध्यान नहीं दिया है।
जर्जर छत के नीचे दशहत में पढ़ रहे बच्चे
पिरान कलियर क्षेत्र के स्कूलों में बारिश होते जलभराव हो जाता है। कुछ स्कूलों की बिल्डिंग भी जर्जर हैं। जिससे स्कूलों में छात्रों को और शिक्षकों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। पिरान कलियर राजकीय प्राथमिक विद्यालय नम्बर एक, नम्बर दो, महमूदपुर राजकीय प्राथमिक विद्यालय, राजकीय प्राथमिक विद्यालय मुकर्रबपुर की बिल्डिंग जर्जर अवस्था में है। इन विद्यालयों में बारिश होने पर जलभराव की स्थिति उतपन्न हो जाती है। इसके अलावा रहमतपुर गांव के राजकीय उच्च प्रा.विद्यालय और माजरी गुम्मावाला प्राथमिक विद्यालय में बारिश का पानी भरने से स्कूली छात्र छात्राओं और शिक्षकों को भरी परेशानी का सामना कर स्कूल में प्रवेश करना पड़ता है ।स्कूल के कमरों में भी पानी भर जाता है। और कमरे में रखे टाट पट्टी भी भीग जाते है।इसका कारण यह है कि स्कूलों में से पानी निकासी के लिए कोई नाला नहीं है।जिस कारण स्कूलों में जल भराव हो जाता है।