- जिले स्तर पर डीएम सरकारी भूमि को चिह्नीत करेंगे और रजिस्टर तैयार कराएंगे।
- जिलाधिकारी एक कमेटी का गठन करेंगे।
- यह कमेटी रजिस्टर में दर्ज भूमि का सार्वजनिक रूप से प्रकाशन कराएगी और इच्छुक लोगों से आवेदन मांगेगी।
- भूमि की न्यूनतम दर सर्किल रेट के आधार पर तय होगी।
प्राथमिकता भी तय होगी
लोगों को जमीन देने की प्राथमिकता तय होगी। इसमें भूमि के उपयोग का प्रावधान, मसलन उद्योग, जैविक खेती आदि भी देखा जाएगा। राज्य सरकार अपनी प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को वरीयता देगी। यह भी देखा जाएगा कि परियोजना कितने समय में पूरी होगी। इससे कितने लोगों को रोजगार मिलेगा। अधिक लोगों को रोजगार देने वाली परियोजनाओं को आगे रखा जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि सरकार को इससे राजस्व का कितना फायदा होगा।
सरकारी भूमि को निजी क्षेत्र को देने की स्थिति में प्रदेश सरकार की नीति के पारदर्शी न होने का आरोप लगता रहा है। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने भी इसमें सरकार को पारदर्शी नीति बनाने का आदेश जारी किया था।
इसी दबाव में सरकार को अब यह नीति बनानी पड़ रही है। शासन के सूत्रों का कहना है कि इस नीति को अंतिम रूप दिया जा चुका है। उच्च स्तर पर मंथन जारी है और नीति को मंत्रिमंडल के समक्ष भी रखा सकता है।
सरकारी भूमि को लेकर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट से कई आदेश अलग-अलग समय में जारी किए गए हैं। इन निर्देशों के आधार पर ही शासन स्तर पर निर्णय लिया जाना है। शासन स्तर पर यह मामला विचाराधीन है। नीति को अंतिम स्वरूप मिल जाने के बाद ही इस पर कुछ कहा जा सकता है। इतना जरूर है कि निर्णय जल्द से जल्द लेने की कोशिश की जा रही है।
- सुशील कुमार, सचिव राजस्व