दरअसल, 15वें वित्त आयोग के विचारणीय विषय (टर्म ऑफ रिफरेंस) में सार्वजनिक प्रशासन की कार्यकुशलता में वृद्धि करने, लोक प्रशासन में नवोन्मेषी विचारों व प्रक्रियाओं को लागू करने एवं संपूर्ण व्यवस्था को समयबद्ध करने के लिए विभागीय संरचना को पुनर्व्यवस्थित करने की अपेक्षा की गई है।
माना गया है कि प्रतिस्पर्धा के बढ़ते दौर के अनुकूल एवं भविष्य की चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाने के लिए लोकसेवकों में दूरसंचार, सूचना प्रौद्योगिकी, कंप्यूटर के नवीन ज्ञान एवं कौशल में वृद्धि करना जरूरी है।
जानकारी के मुताबिक प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों निगमों, बोर्डों, विभिन्न संस्थानों व समितियों में हजारों की संख्या में पद खाली हैं। कई विभागों के स्तर पर खाली पदों पर नियमित भरती की प्रक्रिया के लिए प्रस्ताव उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और उत्तराखंड लोकसेवा आयोग को भेजे जाने की तैयारी चल रही है।
लिहाजा, शासन ने विभागों को अर्हता और योग्यता में संशोधन करने के बाद ही रिक्त पदों के प्रस्ताव तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं। अब नए निर्देशों के तहत संशोधन के बाद ही नियमित भर्ती के प्रस्ताव चयन आयोगों को भेजे जाएंगे।
सचिव वित्त अमित सिंह नेगी ने सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों और सचिवों तथा सभी विभागाध्यक्षों को पत्र जारी कर कहा है कि वे विभागीय संरचना को दोबारा से व्यवस्थित करें और पदों की अर्हता व योग्यता में संशोधन कर प्रस्ताव तैयार करें। उन्होंने सभी विभागों और विभाग प्रमुखों से यह भी कहा है कि वे रिक्त पदों की भरती के प्रस्ताव चयन आयोगों को भेजने से पहले वित्त और कार्मिक विभाग की सहमति आवश्यक रूप से प्राप्त कर लें।