नियम के अनुसार अब नए साल से पुरानी सुविधाओं के बदले में लिए जाने वाली कीमत बढ़ाने को सरकारी अस्पतालों में तैयारी शुरू कर दी है। अब बढ़ी कीमत प्राइवेट अस्पताल और लैब के बराबर पहुंच गई है।
नियम के अनुसार समस्त सरकारी अस्पतालों में एक जनवरी से पर्चा 21 के बजाय 23 रुपये का हो जाएगा। अल्ट्रासाउंड 428 से 471 रुपये का हो जाएगा। इसी तरह अन्य जांचें भी महंगी हो जाएगी। बड़ा सवाल यह है कि प्रत्येक साल इलाज तो महंगा कर दिया जाता है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर सरकार और प्रशासन चुप है।
अल्ट्रासाउंड की हालत खराब
जिला और मेला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की स्थिति बेहद खराब हो गई है। अल्ट्रासाउंड के नए साल से 471 रुपये हो जाएंगे, लेकिन जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट नहीं है तो मेला अस्पताल में मशीन खराब पड़ी है। गर्भवती महिलाओं को जननी सुरक्षा योजना के तहत निशुल्क अल्ट्रासाउंड का लाभ मिलता है, लेकिन अन्य मरीजों को अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिल पाती।
पिछले वर्ष की तुलना में जांचों के बढे़ रेट
सुविधा अब तक नया रेट प्राइवेट रेट
पर्चा 21 23 200-500
अल्ट्रासाउंड 428 471 500- 600
एक्स-रे 150 165 250
ईसीजी 215 236 200
भर्ती शुल्क 108 118 00
एमएलपीसी 215 236 00
एलएफटी 321 353 500
सीबीसी 173 190 250
ब्लड शुगर 42 46 50
यूरीन 42 46 80
हीमोग्लोबिन 13 14 20
टाइफाइड 58 64 100
पीलिया 58 64 100
कीडनी 126 137 200
बैड जनरल 42 46 500
बैड प्राइवेट 322 354 1000
(कीमत रुपये में)
शासनादेश के मुताबिक एक जनवरी से सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं की बदले में लिए जाने वाले शुल्क में दस प्रतिशत की बढ़ोतरी हो जाएगी। इसके लिए रेट रिवाइज करने के साथ ही सूची बनाने की तैयारी हो चुकी है। साफ्टवेयर में 31 दिसंबर को काम समाप्त होने के बाद फीड करा दिया जाएगा ताकि एक जनवरी से बढ़े शुल्क के अनुसार फीस ली जा सके।
- डा. राजकुमार, प्रमुख अधीक्षक, जिला अस्पताल