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गरीब परिवारों की बेटी के लिए खुशखबरी लाया सरकार का ये फैसला

Sun, 04 Jun 2017 01:14 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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हर बार से हटकर उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सरकार इस बार शून्य घाटे का बजट सदन में पेश करेगी। इस दफा ई-बजट भी अमल में लाया जा रहा है, जो कागज के बजाय पेन ड्राइव में होगा।
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इसके अलावा महिलाओं के लिए यानी जेंडर बजट को अलग से लाया जाएगा। बृहस्पतिवार को कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक में बजट की राशि का खुलासा तो नहीं किया गया, मगर उम्मीद है कि यह लगभग चालीस हजार करोड़ रुपये होगी।

इसके अतिरिक्त रिवर राफ्टिंग को मनोरंजन कर से मुक्त करने के साथ ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की पेंशन को 11 हजार से बढ़ाकर 21 हजार करने को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी है। कई अन्य महत्वपूर्ण फैसले भी कैबिनेट बैठक में लिए गए।
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में सबसे पहले बजट के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। इसके अतिरिक्त गौरा देवी और नंदा देवी कन्याधन योजनाओं का मर्जर करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। यह तय किया गया है कि अब नंदा गौरा योजना नाम से एक योजना चलाई जाएगी।

पहले इस योजना का लाभ 1700 रुपये मासिक आय वाले परिवारों की बालिकाओं को मिलता था, मगर अब ग्रामीण क्षेत्र में 36 हजार और नगरीय क्षेत्र में 42 हजार रुपये वार्षिक आय पर योजना का लाभ दिया जाएगा। योजना का लाभ देने की प्रक्रिया को भी बदला गया है। इसके तहत बालिका जन्म लेने के बाद तीन महीने की हो जाएगी तो पांच हजार रुपये, एक साल की होगी तो पांच हजार रुपये दिए जाएंगे।

51 हजार की कुल सात किस्तें बालिका को प्रदान की जाएंगी

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इसके अलावा आठवीं और फिर दसवीं कक्षा में जाने पर एक-एक किस्त दी जाएगी। इस प्रकार 51 हजार रुपये की कुल सात किस्तें बालिका को प्रदान की जाएंगी।

सातवीं किस्त सोलह हजार की होगी, जो उसे विवाह पर प्रदान की जाएगी। यह भी तय किया गया है कि चेक या ड्राफ्ट के बजाय सीधे ई-पेमेंट होगी। लाभार्थियों का चयन करने के लिए संबंधित जिले के सीडीओ की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें जिला कार्यक्रम अधिकारी और लीड बैंक का कार्यक्रम अधिकारी उपाध्यक्ष होगा। लीड बैंक का एक प्रतिनिधि और बाल विकास परियोजना अधिकारी सदस्य होंगे।

एक अन्य फैसले में वर्ष 1975-1977 में इमरजेंसी के दौरान मीसा के अंतर्गत राज्य की जेलों में बंदी बनाए गए राज्य के मूल निवासियों को 16 हजार रुपये पेंशन दिए जाने का फैसला हुआ है। अन्य भाजपा शासित राज्यों की तर्ज पर उत्तराखंड में हुए इस फैसले का लाभ 22 बंदियों को मिलेगा। इसी क्रम में यह भी तय हुआ है कि केंद्र की तर्ज पर राज्य में भी स्टार्ट अप पॉलिसी लाई जाएगी। यह योजना सात साल के लिए होगी। इसमें राज्य सरकार ने लगभग तीस विभागों को चिह्नित किया है, जिनमें बागवानी, उद्यानिकी, टूरिज्म, फूड प्रोसेसिंग आदि प्रमुख हैं।
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बनाया जाएगा दो लाख वर्ग फिट का इनक्यूबेशन सेंटर

CM trivendra singh rawat
उद्यमिता को बढ़ावा देने के मकसद से लाई जाने वाली इस योजना के लिए दो लाख वर्ग फिट का इनक्यूबेशन सेंटर बनाया जाएगा। औद्योगिक घरानों को आकर्षिक कराकर पांच सौ करोड़ रुपये के पूंजी निवेश से इसे आरंभ किया जाएगा। साथ ही केंद्र की योजनाओं से इसे लिंक भी किया जाएगा।

इसकी देखरेख के लिए राज्य स्तरीय उद्यमिता पैनल की स्थापना होगी और एक इनवोशन परिषद का भी गठन होगा, जिसमें प्रमुख सचिव एमएसएमई की अध्यक्षता में निदेशक उद्योग को सदस्य बनाया जाएगा। इस परिषद में कुल 14 सदस्य होंगे। कैबिनेट ने गन्ना किसानों के लिए वर्ष 15-16 के बकाया 44.53 करोड़ के भुगतान का भी निर्णय लिया है।

प्रमुख फैसले -:
- गौरा देवी और नंदा देवी कन्याधन योजनाओं का मर्जर करके अब नंदा गौरा योजना नाम से एक योजना चलाई जाएगी।
- वर्ष 1975-1977 के दौरान मीसा के अंतर्गत राज्य की जेलों में बंदी बनाए गए राज्य के मूल निवासियों को मिलेगी पेंशन।
- केंद्र की तर्ज पर राज्य में भी स्टार्ट-अप पॉलिसी लाई जाएगी। सात साल की योजना के लिए तीस विभाग किए गए चिन्हित।
- गन्ना किसानों के लिए वर्ष 15-16 के बकाया 44.53 करोड़ के भुगतान संबंधी प्रस्ताव भी कैबिनेट से हुआ मंजूर।
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