लोगों के सैर-सपाटे, तफरीह से जुड़े एक विभाग में अधिकारी हैं। अभी तक शहर के कूड़े, कचरे से पटे, बंद पड़े स्थलों का ख्याल नहीं आया था।
साथ-साथ फोटोग्राफ भी
आला अधिकारी का एक पत्र क्या पहुंचा, सब कस-बल निकल गए। खुद ही मौके पर पहुंच सफाईकर्मियों को आदेशित-निर्देशित करने लगे। हर जगह के साथ-साथ फोटोग्राफ भी करा रहे हैं ताकि सनद रहे।
मातहतों पर भी अपने इस कार्य के प्रचार-प्रसार के लिए दबाव बना रहे हैं। जिन मातहतों से कभी बनती नहीं थी, आजकल उन्हें भी पुचकारते दिख रहे हैं। मंशा बस यही है कि किसी तरह ऊपर वाले खुश हो जाएं और सीआर अच्छी रहे।
वहीं सफाईकर्मियों के साथ-साथ साहब को घूमते देख मातहत कहना नहीं भूलते कि साहब तो सेनेट्री सुपरवाइजर हो गए। कई तो उनकी तेजी को जल्दबाजी का काम शैतान का बताने से भी नहीं चूकते।