पिछले दिनों एक विवि में कुलपति पद के लिए वेकेंसी निकली थी। विवि के कुछ अधिकारी भी अब इस कुर्सी की चाहत रखने लगे थे।
कई ने तो आवेदन करने के बाद कुलपति के तौर पर प्रसिद्धि भी पा ली थी। कोई भी आता है तो सीधे बोलता है, कुलपति महोदय कैसे हैं? एक दिन अचानक एक ऐसा आदमी आया, जो कि वर्तमान कुलपति को नहीं जानता था।
बस दावेदार कुलपति को जानता था। उनके सामने ही बोल पड़ा, कुलपति जी कैसे हैं। फिर क्या था, बेचारा दावेदार कुलपति पानी-पानी हो गया।
आंखे दिखाई तो व्यक्ति माजरा समझ गया। उसने तुरंत मुंह घुमाया और वर्तमान कुलपति की ओर करके इशारा किया, जैसे उनसे ही पूछा हो। आसपास खड़े बाकी अधिकारी मुंह दबाकर हंसते रहे।