राजधानी देहरादून एक बड़े कॉलेज में बड़े पद के मास्साब आजकल फूले नहीं समा रहे हैं। हाल ही में उन्हें एक बड़ा नेतागिरी का मौका जो मिला है।
महाशय को एक राजनीतिक संगठन में सेटिंग गेटिंग से एक बड़ा पद मिल गया है। फिर क्या था, महाशय पहुंच गए महिलाओं के अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने।
हाथ में झंडा उठाए मास्साब उस वक्त खामोश रह गए, जब उनके एक साथी ने चुहलबाजी करते हुए कहा कि जनाब आपकी फितरत से यह आंदोलन मैच नहीं कर रहा है।
इसके बाद जैसे तैसे मास्साब नारे लगाकर चलते बने। महाशय अपने कॉलेज में इसीलिए पहचाने जाते हैं कि वह महिलाओं के इर्द गिर्द घूमते रहते हैं।