फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

घोर तप के बाद भी नहीं टिके साहब

Mon, 19 Oct 2015 04:24 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
कुर्सी का मोह जल्दी से छूटता नहीं है। धार्मिक अनुष्ठान और कर्मकांड भी कलक्टर साहब की कुर्सी नहीं बचा सके।
विज्ञापन


अंगद के पैर की तरह जमे इस अफसर की गहराई नापने में सरकार को भी बहुत वक्त लग गया। लेकिन आखिरी वक्त तक खबर नहीं थी कि क्या होने वाला है।

कलक्टर के पद पर बने रहने के लिए इन महाशय ने क्या नहीं किया। हिमालय की कंद्राओं से जड़ी-बूटी मंगाकर महायज्ञ कराया गया, गंगा मैया से भी प्रार्थना की, मंदिरों में 21-21 हजार रुपए की दक्षिणा दी, गाय दान की, भंडारे कराए, लेकिन वक्त ने सारी बाजी पलट डाली।
विज्ञापन


साहब सुबह सवेरे दफ्तर जाने या जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय अपनी पोस्टिंग रुकवाने के लिए धार्मिक अनुष्ठान में लग जाते थे। पूरा स्टाफ परेशान, कैसे हो काम। धार्मिक कर्मकांड करते करते हुए ये महाशय यह भी भूल गए कि हर शह वक्त की गुलाम होती है।
विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें