बहुगुणा सरकार में तमाम विरोध और विवादों के बावजूद ठाठ के साथ जिले की कलक्टरी करने वाले एक साहब की इन दिनों नींद उड़ी है।
नींद आए भी कैसे, सूबे के निजाम ने बढ़िया पोस्टिंग करने की जगह इनका नाम एक साल बाद की प्रतीक्षा सूची में डाल दिया है। जनाब बड़ी मुश्किल से वक्त लेकर सरकार के सामने पेश हुए।
उन्होंने एमडीडीए उपाध्यक्ष बनने की ख्वाहिश रखी। सरकार ने गौर देखा और बोले एक साल बाद आना, तब सोचूंगा। अभी जो काम कर रहे हो, उसे संजीदगी से करो। बेचारे दिग्गज हाकिम मरते क्या न करते।
सरकार से ऐसी उम्मीद नहीं थी, लेकिन जो मिला उस गम को भुलाना आसान नहीं है। अब भड़ास मिटाने के लिए यही कहते घूम रहे हैं, निजाम-ए-मयकदा कुछ इस कदर बिगड़ा है ए साकी, जाम उन्हीं को मिलते हैं जिन्हें पीना नहीं आता।