अपने जन्म दिन पर परदादा गूगल पर छाए रहे, लेकिन परपोता टैक्सी चला कर अपने परिवार को पाल रहा है। 21 अक्टूबर को पं. नैन सिंह रावत के जन्म दिन पर गूगल ने उनका डूडल बनाकर श्रद्धांजलि दी।
परिवार को पालने के लिए कवींद्र रावत अपने परदादा के नाम पर खोले गए पर्वतारोहण संस्थान में बस एक नौकरी की चाह रखते हैं। कवींद्र रावत उनके एकमात्र वंशज हैं।
सर्वे आफ इंडिया ने दस अप्रैल 1802 को ग्रेट ट्रिगोनोमैट्रिकल सर्वे (जीटीएस) की शुरुआत की थी। इस सर्वे का उद्देश्य भारतीय उपमहाद्वीप के अलावा मध्य एशिया और महान हिमालय का मानचित्र तैयार करना था। पंडित नैनसिंह की जीवनी में उल्लेख है कि वह 1863 तक मिलम के स्कूल में शिक्षक रहे। तभी से उनको पंडित कहकर संबोधित किया जाने लगा। पंडित नैन सिंह और उनके भाई किशन सिंह 1863 में जीटीएस से जुड़े और नैन सिंह 1875 तक तिब्बत की खोज में लगे रहे।
जीटीएस के अंतर्गत पंडित नैन सिंह ने काठमांडू से लेकर ल्हासा और मानसरोवर झील का नक्शा तैयार किया। इसके बाद वह सतलुज और सिंध नदी के उद्गम स्थलों तक गए। उन्होंने 1870 में काशगर मिशन और 1874 लेह मिशन पर काम किया। पंडित नैन सिंह को लेह से ल्हासा तक तिब्बत के उत्तरी भाग का मानचित्र तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी।