गूगल अर्थ ने राजधानी दून में अवैध पेड़ कटान की पोल खोल दी। पीपुल फॉर एनिमल संस्था ने गूगल अर्थ की मदद से कुछ क्षेत्रों की तस्वीरें निकाली।
ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर
इसके बाद वन विभाग से आरटीआई के तहत जानकारी मांगी गई तो मालूम हुआ कि तीन पेड़ों की अनुमति लेकर दो सौ से अधिक पेड़ काट दिए गए। पीएफए ने ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की। इस पर वन विभाग और तीन बिल्डरों को नोटिस जारी कर दिया गया है।
पीएफए की सदस्य सचिव गौरी मौलेखी ने बताया कि उन्होंने गूगल अर्थ से राजपुर रोड और मसूरी रोड की पांच और दस साल पुराने तस्वीरें निकाली। इन क्षेत्रों की वर्तमान तस्वीरें भी निकाली गईं।
अब खाली मैदान नजर आ रहे
तस्वीरों के मिलान से साफ हुआ कि पहले जहां हरे पेड़ खड़े थे, वहां अब खाली मैदान नजर आ रहे हैं। इसके आधार पर उन्होंने आरटीआई लगाई।
जवाब आया तो पता चला कि राजपुर रोड पर बन रहे सातमंजिला कांप्लेक्स पैसिफिक हिल्स के लिए सिर्फ तीन पेड़ों की परमिशन वन विभाग ने दी थी, लेकिन यहां करीब 200 पेड़ काट दिए गए। इसके अलावा विस्परिंग विला में भी अनुमति की आड़ में कई पेड़ काटे गए। मसूरी वन प्रभाग के अंतर्गत हाथीपांव में भी अवैध पेड़ कटान सामने आया है।
मौलेखी ने बताया कि ग्रीन ट्रिब्यूनल में गूगल अर्थ की इमेज और आरटीआई के आधार पर याचिका दायर की गई, जिसमें राज्य सरकार भी पार्टी बनी है। ग्रीन ट्रिब्यूनल ने याचिका स्वीकार करते हुए पैसेफिक डेवलपमेंट कारपोरेशन, विस्परिंग विलाज, मार्क्स इंफ्रा होम्स प्राइवेट लिमिटेड और वन विभाग को नोटिस जारी किया है। ट्रिब्यूनल में उन्हें अपना पक्ष रखना होगा। अगली सुनवाई तीन सितंबर को होगी।