नौकरी के पीछे भागने वाले वालों के लिए यह युवा किसी आदर्श से कम नहीं। नौकरी का मोह छोड़ प्रदेश के कई युवा फूलों की खेती कर अपना करियर संवार रहे हैं। इससे न सिर्फ उनका परिवार चल रहा है, बल्कि कई अन्य लोगों को भी रोजगार मिल रहा है। परंपरागत खेती की बजाय फूल उगाकर उन्हें अच्छी-खासी आमदनी हो रही है।
मसूरी के क्यारकूली भट्ट निवासी आनंद रावत का कहना है कि परंपरागत खेती के बजाय फूलों की खेती अधिक फायदेमंद हैं। मसूरी के एमपीजी कॉलेज से स्नातक करने के बाद उन्होंने नौकरी की तलाश के बजाय वर्ष 2008 में कारनेशन फूल खेती शुरू की। उनके इस काम से 12 अन्य लोगों को भी रोजगार मिला।
शुरुआत में वह गेहूं, मक्का और दाल की खेती करते थे, लेकिन 2008 में उन्होंने छह हजार वर्ग मीटर में कारनेशन की खेती शुरू की। फूलों की खेती उनके लिए ज्यादा फायदेमंद रही। इसके बाद अब वह दस बीघा जमीन में फूलों की खेती कर रहे हैं। इस समय उनका 12 लाख का टर्नओवर है।
बाजपुर, ऊधमसिंह नगर निवासी बलदेव राज बताते हैं कि वर्ष 2006 में बैंक से लोन लेकर उन्होंने 1120 वर्ग मीटर में फूलों की खेती शुरू की। अब वह 12 हजार वर्ग मीटर में विभिन्न प्रजातियों के फूल उगा रहे हैं। 10 से 12 अन्य लोग भी उनसे जुड़कर कार्य कर रहे हैं और उनका टर्नओवर 50 लाख पहुंच चुका है।
सितारगंज के सुरेश कुमार ने बताया कि उन्होंने बहुत छोटे स्तर, मात्र आधा बीघा से फूलों की खेती शुरू की, लेकिन उन्हें कभी घाटा नहीं हुआ। आज वह ढाई एकड़ में फूलों की खेती कर रहे हैं।
वहीं, नया गांव नैनीताल के बलवीर सिंह कांबोज कहते हैं कि वर्ष 2006 में एमएससी करने के बाद उन्होंने फूलों की खेती में ही करियर बनाने की सोची। आज वह अपनी पत्नी सुदेश कौर के साथ 10 से 12 एकड़ भूमि में फूलों की खेती कर रहे हैं। इस व्यवसाय से 25 अन्य लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं। फूलों की खेती से उनका टर्नओवर 80 लाख है।