मंदिर परिसर में वीआईपी हेलीपैड वाले रास्ते की तरफ पारंपरिक शैली में गोमुख आकार की जलधारा तैयार कर स्थापित किया जाएगा। धारा के पानी का उपयोग आचमन, पंच स्नान व पीने के लिए होगा।
धारा से गिरने वाला पानी मंदिर परिसर में न फैले, इसके लिए पांच मीटर लंबी, एक मीटर चौड़ी व छह इंच गहरी तलिया भी बनाई जाएगी, जिसमें धारे से गिरने वाला एकत्रित होगा। जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि 15 दिनों के भीतर यह कार्य पूरा कर दिया जाएगा। इस गोमुख आकार से जलधारा के माध्यम से पहाड़ी शैली को देश-विदेश में भी नई पहचान मिल सकेगी।