दून सराफा के दो हजार से अधिक स्वर्ण कारीगरों की रोजी-रोटी पर तलवार लटक रही है। सोने के आयात पर रोक से ज्वेलरी बनाने के लिए कच्चा माल जुटाना ज्वेलर्स के लिए मुश्किल हो रहा है।
ऐसे में वह इटली, मलेशिया जैसे देशों की बनी-बनाई ज्वेलरी की ओर रुख कर रहे हैं। अलबत्ता वहां की डिजाइन यहां बहुत पसंद नहीं की जाती, इसके बावजूद ‘सरकार की मार’ से बचने के लिए वह यह कदम उठा रहे हैं।
केंद्र सरकार के लाट (200 किलो) से कम सोने के आयात पर रोक से केवल बड़ी कंपनियां ही इसे ले पाएंगी। यह अन्य सराफा कारोबारियों के लिए एक झटके की तरह है। हालात की गंभीरता को देखते हुए सराफा बाजार में हड़कंप है। ग्राहक बड़े आर्डर से हाथ खींच चुके हैं।
ज्वेलर्स ने नई बुकिंग लेनी बंद कर दी है। जेम्स एंड ज्वेलरी फेडरेशन से जुड़ी ज्वेलरी एसोसिएशन आफ उत्तरांचल के पदाधिकारी भी इस मसले पर गंभीर है। उनके मुताबिक अगर कोई रास्ता नजर नहीं आया तो फिर हड़ताल ही आखिरी हथियार होगी। इस संबंध में इस वक्त वह बैठकें कर रहे हैं। जल्द ही अंतिम रणनीति की घोषणा की जाएगी।
ट्रेड बंद करने की नौबत
हालात खराब हैं। ट्रेड बंद करने की नौबत आ रही है। ज्वेलर्स ने सरकार से नैतिक वायदा किया है कि आर्थिक हालात को देखते हुए सिक्के नहीं बेचेंगे। बैंक पहले ही सिक्के बेचना बंद कर चुके हैं। एक आम कारोबारी को तगड़ा झटका लगना तय है।
-विपिन बेरी, प्रदेश अध्यक्ष, ज्वेलरी एसोसिएशन आफ उत्तरांचल