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12 हजार साल पहले भी ग्लोबल वार्मिंग से आई बाढ़

Thu, 29 Sep 2016 09:54 AM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
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himalaya
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12 हजार साल पहले भी हिमालयी क्षेत्र ग्लोबल वार्मिंग के दौर से गुजर चुका है। इसी दौरान गढ़वाल और लेह-लद्दाख के ‘कोल्ड डिजर्ट’ की नदियों में बेतहाशा बाढ़ आई थी।
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इस बाढ़ ने गढ़वाल में स्लोप पैदा कर दिए और लेह-लद्दाख का कोल्ड डिजर्ट हरियाली से भर गया। इसके बाद यहां सभ्यता का विकास होना शुरू हुआ। हाल में लद्दाख से साक्ष्य इकट्ठे करके वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान की टीम लौटी है। 

हिमालयी क्षेत्र में 12 हजार साल पहले ग्लोबल वार्मिंग प्राकृतिक कारणों से हुई थी। सूर्य और पृथ्वी की स्थिति में बदलाव के कारण यह क्षेत्र गरमाया और भीषण बारिश हुई, नदियों में बाढ़ आ गई। इस बदलाव ने सभ्यता के विकास की अलग कहानी लिखी।
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गढ़वाल में स्लोप बने और आबादी बसी, खेती होने लगी। इसी तरह लेह-लद्दाख के निर्जन कोल्ड डिजर्ट में हरियाली ने आंखें खोली। नदी किनारे लोग बसने शुरू हुए। वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव की अगुवाई में अनिल कुमार, पंकज शर्मा, पूनम चहल आदि विज्ञानियों की टीम ने लेह-लद्दाख क्षेत्र की नदियों पर शोध पूरा किया है। 

इसके पहले डा. श्रीवास्तव ने गढ़वाल क्षेत्र पर शोध पूरा किया था। हाल में लद्दाख की सिंधु, शियांग, नुब्रा आदि नदियों के किनारे विज्ञानियों ने मानव सभ्यता के साक्ष्य तलाशे। चूल्हे की लाल मिट्टी की कार्बन डेटिंग जांच कराने पर यह 12 हजार साल पुरानी पाई गई। शोध में पाया गया कि 12 हजार साल पहले के घटनाक्रम के बाद यहां बाढ़ की आवृत्ति बढ़ गई।

पुरानी बाढ़ में यहां मानव बसने की निशानदेही नहीं हुई है। लेकिन 10 हजार साल पहले यहां नदियों के किनारे मानव होने के साक्ष्य मिले हैं। इसके बाद पांच-छह हजार साल पहले यहां सभ्यता का विकास पाया गया है। तब लोगों ने यहां घर बनाने शुरू कर दिए थे। नदियों में बाढ़ आने से कोल्ड डिजर्ट में हरियाली पनपी और मानव यहां बसने के लिए आकर्षित हुई।

जिस तरह बाढ़ के कारण गढ़वाल के स्लोप बने, उसी तरह बाढ़ ने लेह-लद्दाख के निर्जन कोल्ड डिजर्ट में हरियाली विकसित की। मानव यहां रहने के लिए आकर्षित हुआ। यहां सभ्यता के विकास पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं।
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- डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव, वरिष्ठ विज्ञानी, वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान
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