सात वर्षों से गिर रही फलों की पैदावार
उत्तराखंड में बीते सात वर्षों से फलों की पैदावार चिंताजनक रूप से घट गई है। क्लाइमेट सेंट्रल की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2016-17 में उत्तराखंड में 25,201.58 हेक्टेयर क्षेत्र में सेब का उत्पादन किया गया, जो वर्ष 2022-23 में 55 फीसदी की गिरावट के साथ घटकर महज 11,327.33 हेक्टेयर रह गया। इस अवधि के दौरान सेब के उत्पादन में 30 फीसदी की गिरावट देखी गई। नींबू की विभिन्न प्रजातियों में भी 58 फीसदी की कमी आई है। गौरतलब है कि 2016-17 में फल उत्पादन का कुल क्षेत्र करीब 177,324 हेक्टेयर था, वह 2022-23 में घटकर महज 81692.58 हेक्टेयर रह गया। इसी तरह जहां उत्तराखंड में 2016-17 के दौरान फलों का कुल उत्पादन 662847.11 मीट्रिक टन था, जो 2022-23 में घटकर 369447.3 मीट्रिक टन रह गया।
चमोली व अल्मोड़ा में फल उत्पादन घटा
जिलावार देखें तो टिहरी में बागवानी के क्षेत्रफल में सबसे ज्यादा कमी हुई। इसके बाद देहरादून है। हालांकि दोनों ही जिलों में इसके सापेक्ष फलों के उत्पादन में अधिक कमी नहीं देखी गई। दूसरी तरफ, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और हरिद्वार में बागवानी के क्षेत्रफल और फलों के उत्पादन दोनों ही में काफी गिरावट आई है। अल्मोड़ा में फल उत्पादन 84 फीसदी घट गया है, जो उत्तराखंड में सर्वाधिक है। वहीं चमोली में 2016-17 से 2022-23 के बीच बागवानी के क्षेत्रफल में महज 13 फीसदी की कमी दर्ज की गई, लेकिन फल उत्पादन में करीब 53 की गिरावट आई है। दूसरी तरफ उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग में बागवानी के क्षेत्रफल में क्रमशः 43 और 28 फीसदी की कमी होने के बावजूद फलों के उत्पादन में 26.5 और 11.7 फीसदी की वृद्धि देखी गई है।
गर्म और शुष्क होती सर्दियों से उत्पादन पर पड़ रहा असर
1970 से 2022 के बीच उत्तराखंड के औसत तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है। उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग जिलों में बर्फ से ढका क्षेत्र साल 2000 की तुलना में 2020 में 90 से 100 वर्ग किमी तक सिकुड़ गया है। हिमालय के ऊंचे क्षेत्रों में अधिक सर्दी और बर्फ सेब, नाशपाती, आड़ू, आलूबुखारा, अखरोट, खुबानी जैसे फलों को फलने के लिए बेहद जरूरी है।
- सेब को दिसंबर से मार्च के बीच 1200 से 1600 घंटे के लिए सात डिग्री सेल्सियस से कम की चिलिंग आवश्यकता होती है। ऐसे में कम बर्फबारी के चलते सेब की गुणवत्ता और उत्पादन में कमी हुई है। - डॉ. रश्मि चमोली, एग्रोफॉरेस्ट्री विशेषज्ञ, वीसीएसजी यूनिवर्सिटी ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री
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- उत्तरकाशी के हर्षिल, पुरोला, मोरी और चमोली जिले के जोशीमठ व नीती घाटी में सेब का उत्पादन अच्छा होता रहा है। लेकिन कुछ समय से बर्फबारी में कमी होने और वूली एप्पल एफिड कीट व एप्पल स्कैब व पाउडरी मिल्डू रोग से भी इसको नुकसान पहुंच रहा है। - डॉ. अकित कुमार टम्टा, असिस्टेंट प्रोफेसर, वीसीएसजी उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार