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सिविल मामलों को आपराधिक रंग देना कानूनन गलत : अदालत

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अदालत ने जमीन के एक सौदे में कथित धोखाधड़ी के मामले में पुलिस जांच के आदेश देने से इन्कार कर दिया। प्रथम अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट किया कि मामला अनुबंध के उल्लंघन का है जो दीवानी प्रकृति का है लेकिन इसे आपराधिक रंग देकर पुलिस कार्रवाई की मांग करना उचित नहीं है।
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प्रार्थी देवेंद्र सिंह रावत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 175(3) के तहत अदालत में अर्जी लगाई थी। गुहार लगाई थी कि उन्होंने 28 जून 2022 को ग्राम रतनपुर में 222 वर्गमीटर भूमि के लिए शिवानी सहगल के साथ 43 लाख रुपये में सौदा तय किया था। लगभग 25 लाख रुपये का भुगतान बैंक और कैश से किया था। आरोप लगाया कि विपक्षी ने रजिस्ट्री की तय तिथि पर बीमारी का बहाना बनाया और बाद में टालमटोल करती रही। दलील दी कि जब उन्होंने खुद भूमि की पैमाइश कराई तो रकबा कम निकला। इस आधार पर धोखाधड़ी में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश देने की मांग की।

अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संजीव कुमार ने कहा कि विक्रय अनुबंधपत्र की प्रति अदालत में पेश नहीं की गई, जिसे आधार बनाकर धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था। इससे यह स्पष्ट नहीं हो सका कि अनुबंध की शर्तें क्या थीं और वह पंजीकृत था या नहीं।
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