एक बार फिर राजधानी देहरादून का नारी निकेतन सवालों के घेरे में हैं। यहां की व्यवस्था पर फिर सवाल उठे हैं। मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में नारी निकेतन की एक कर्मचारी पर आरोप लगाया गया है कि उसने दो लड़कियों को बेचा है।
आरोप है कि अधिक उम्र के लोगों से पैसा लेकर संवासिनियों की जबरन शादी कराई गई है। शिकायत मिलने पर सोमवार को महिला आयोग की टीम ने नारी निकेतन पहुंचकर एक-एक संवासिनी से अकेले में बात की। आयोग की टीम को यहां पर कई तरह की गड़बड़ियां मिली हैं।
उनके कई सवालों का भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। महिला आयोग की उपाध्यक्ष प्रभावती गौड़, उनके पीए दिनेश और सामाजिक कार्यकर्ता निधि नेगी ने सोमवार को नारी निकेतन पहुंचकर संवासिनियों से पूछताछ की। प्रभावती गौड़ ने बताया कि जांच में कई सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं मिले हैं।
बताया कि दो संवासिनियों को बेचे जाने की सूचना थी। मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में उनके मोबाइल नंबर दिए गए हैं। दोनों संवासिनियों के मोबाइल नंबर मिलाए गए तो एक का बंद मिला, दूसरे नंबर पर बात हो गई। बताया कि संवासिनी की सास ने फोन उठाया और कहा कि फोन पर नहीं आप घर आकर बात करें।
ऐसा कुछ भी नहीं है। उपाध्यक्ष ने बताया कि मंगलवार को उनके घर जाकर स्थिति का पता लग पाएगा। बताया कि जांच में नारी निकेतन से कुछ सवालों के सही जवाब नहीं मिले हैं। यहां पुराना स्टाफ अब नहीं है और संवासिनियां कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।
कर्मचारी कविता को किया नारी निकेतन से निलंबित
बताया कि नारी निकेतन से सालभर में मुक्त की गई संवासिनियों की संख्या 52 बताई गई है, हालांकि उन्हें किसके साथ भेजा गया, किस आधार पर भेजा गया, इनका जवाब नहीं मिल पाया है। आयोग की अधीक्षिका रही सरला रावत के कार्यकाल में भी नारी निकेतन पर कई तरह के आरोप लगे थे।
स्टाफ ने बताया कि इन्हीं सब बातों के चलते सरला के साथ ही एक कर्मचारी कविता को भी नारी निकेतन से निलंबित कर दिया गया था। प्रभावती के अनुसार जांच रिपोर्ट तैयार कर आयोग की अध्यक्ष को सौंपी जाएगी।
126 संवासिनियों के लिए स्टाफ नहीं
सोमवार को महिला आयोग की उपाध्यक्ष प्रभावती गौड़ टीम के साथ नारी निकेतन पहुंची तो पता चला कि वहां रहने वाली करीब 126 संवासिनियों के लिए कोई स्टाफ नहीं है। संवासिनियों को देखरेख करने वाली केयर टेकर भी संप्रेषण गृह (शिशु गृह) की है।
अधीक्षिका का पद संभाल रही मीनाक्षी पोखरियाल पर दोहरी जिम्मेदारी है। वह पहले से संप्रेषण गृह को देख रही हैं। नारी निकेतन की उनके पास अतिरिक्त जिम्मेदारी है। इस बात पर आयोग उपाध्यक्ष आश्चर्यचकित रह गईं कि नारी निकेतन का खुद का एक व्यक्ति तक का स्टाफ नहीं है।
ऐसे में उनकी देखरेख, वहां की व्यवस्थाएं कैसे संचालित हो पा रही हैं? रात आठ बजे के बाद निकेतन के गेट पर कोई पुलिस कर्मी तैनात नहीं किया जाता है। दिन में जो पुलिस कर्मी तैनात रहता है उसकी ड्यूटी आठ बजे तक की है।
ऐसे में संवासिनियों की सुरक्षा सवाल उठ रहे हैं। यह भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि जो आरोप लगाए गए हैं, उसके अनुसार रात को संवासिनियों को बाहर ले जाया जाता है, यदि कोई सुरक्षाकर्मी ही नहीं होगा तो इस संबंध में किससे पूछताछ की जाएगी?
बालिग को दिखाया नाबालिग
नारी निकेतन में रहने वाली अधिकतर संवासिनियों के बालिग होने के बावजूद उन्हें नाबालिग बनाकर रखा गया है। महिला आयोग की उपाध्यक्ष की पड़ताल में इसका खुलासा हुआ।
रुद्रप्रयाग निवासी उषा ने बताया कि वह बीस वर्ष ही है, जबकि माता-पिता ने 16 साल का दिखाकर यहां रखवाया है। बताया कि उसने अपनी मर्जी से शादी कर ली थी, इसलिए ऐसा किया गया।
संवासिनी क्षमा परवीन ने बताया कि वह 20 साल की है, उसे भी 16 साल का दिखाकर माता-पिता ने नारी निकेतन भेज दिया। जिस लड़के से शादी की थी, उसे जेल भिजवा दिया।
परिजनों ने बड़ी बहन को बेच दिया और वे उसके साथ भी ऐसा ही करना चाहते थे। मैंने उनकी बात नहीं मानी तो मुझे नारी निकेतन भेज दिया। 19 साल की मधु को भी नाबालिग दिखाकर डेढ़ साल से नारी निकेतन में रखा गया है। मधु ने कहा कि मैं ससुराल जाना चाहती हूं।
‘मैडम जी मुझे घर जाना है’
दो साल से नारी निकेतन में रह रही लावोनी बांग्लादेश से है। लावोनी ने बताया कि उसके लिए कोर्ट से भी घर जाने के ऑर्डर हो गए हैं। इसके बाद भी उसे घर नहीं भेजा जा रहा है।
नारी निकेतन में आने वाले हर व्यक्ति से लावोनी कहती है कि उसे घर जाना है, हालांकि नारी निकेतन वालों का कहना है कि लावोनी की एलआईयू रिपोर्ट आने पर ही भेजा जाएगा। अमर उजाला की पत्रकार को देखते ही लावोनी बोल पड़ी मैडम जी मुझे घर जाना है, प्लीज मुझे मेरे बच्चे के पास भिजवा दो।
नौकरी करने की मिली सजा
संवासिनी पूजा के चार बच्चे हैं। बताया कि जब ससुराल वालों से नहीं बनी तो अलग रहकर नौकरी करने लगी। लेकिन यह न तो उसके ससुराल वालों को अच्छा लगा न ही मायके वालों को। उन्होंने मिलकर मुझे नारी निकेतन भिजवा दिया।