प्रदेश में बेटियों को हाईस्कूल तक की पढ़ाई के लिए प्रेरित करने वाली मुख्यमंत्री बालिका प्रोत्साहन योजना को बजट की कमी का ग्रहण लग गया है।
इस बार केवल एसएसी, एसटी की कम आय वर्ग वाली छात्राओं को छोड़कर अन्य को मुफ्त साइकिल नहीं मिल पाएगी। शिक्षा निदेशक आरके कुंवर ने कहा कि पिछले दो से तीन शिक्षा सत्रों में इस मद में विभाग को कोई बजट नहीं मिला। जबकि इस बार 16.5 करोड़ के सापेक्ष महज दो करोड़ रुपये मिलने पर यह फैसला लिया गया है।
बालिका शिक्षा का ग्राफ बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार तमाम योजनाएं चला रही हैं। वर्ष 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने प्रदेश में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री बालिका प्रोत्साहन योजना शुरू की थी। जिसके तहत मैदानी जिलों में छात्राओं को साइकिल और पर्वतीय जिलों में साइकिल की कीमत के बराबर एफडी दी जाती रही।
लगभग 58 हजार छात्राओं को मुफ्त साइकिल दी जानी थी...
हरीश रावत
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पिछली सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस योजना के तहत ही छात्राओं को कंप्यूटर, टैबलेट भी बांटे। बहरहाल इस बार पूरे प्रदेश में नौवीं कक्षा की सामान्य, ओबीसी, एससी, एसटी की लगभग 58 हजार छात्राओं को मुफ्त साइकिल दी जानी थी।
इस योजना में कुल 16.5 करोड़ रुपये बजट की डिमांड की गई थी, लेकिन सिर्फ दो करोड़ रुपये ही जारी हो पाए हैं। ऐसे में हफ्ते भर तक शासन में यह माथापच्ची चलती रही कि इन दो करोड़ रुपये का क्या किया जाए। आखिरकार नई सरकार और अफसरों के बीच बैठक में यह निर्णय लिया गया कि एससी/एसटी वर्ग की सिर्फ उन छात्राओं को मुफ्त साइकिल दी जाएगी, जिनकी आय बेहद कम है।
निम्न आय वर्ग की छात्राओं की सूची में नीचे की तरफ से पात्रों का चयन किया जाएगा। बालिका प्रोत्साहन योजना को लेकर सिस्टम की उदासीनता के चलते सामान्य, ओबीसी वर्ग की छात्राओं के अरमानों पर पानी फिर गया है। इनमें सबसे ज्यादा छात्राएं प्रदेश में सबसे अधिक आबादी वाले जनपद हरिद्वार से हैं।
मुख्यमंत्री बालिका प्रोत्साहन योजना के तहत पिछले कुछ शिक्षा सत्रों में विभाग को कोई बजट नहीं मिला। जबकि इस बार इसके लिए 16.5 करोड़ के प्रस्तावित बजट के विपरीत दो करोड़ रुपये जारी हुए हैं। बजट कम होने के कारण एससी, एसटी वर्ग की कम आय वाली छात्राओं को ही साइकिल दी जाएगी।
- आरके कुंवर, निदेशक माध्यमिक शिक्षा, उत्तराखंड