शिक्षा विभाग ने जिला मुख्यालय नैनीताल के एकमात्र राजकीय बालिका इंटर कॉलेज को मॉडल कॉलेज का दर्जा तो जरूर दे दिया लेकिन कॉलेज की जरूरतों को पूरा नहीं किया जा सका।
जिला मुख्यालय का कॉलेज होने के बाद यहां पर न तो प्रधानाचार्या का पद भरा गया है और न ही हिंदी, राजनीति विज्ञान, गृहविज्ञान, विज्ञान शिक्षिकाओं की ही तैनात की गई। इसी कारण मॉडल कॉलेज बनने के बाद कॉलेज में छात्राओं की संख्या भी घटती जा रही है।
कॉलेज में प्रवक्ता के 16 पद सृजित हैं। इनमें से 13 पद ही भरे गए हैं। हिंदी के दो पद सृजित हैं। इनमें से एक पद भरा है जबकि मनोरमा गड़िया की सेवानिवृत्ति के दूसरा पद 31 मार्च 2015 से खाली है। 2015 में पुष्पा बिष्ट के सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति विज्ञान का पद भी खाली है जबकि ऊषा अधिकारी की सेवानिवृत्ति के बाद 31 जनवरी 2017 से गृह विज्ञान का पद खाली है।
एलटी संवर्ग में सृजित 11 पदों में से 10 भरे हैं लेकिन अक्तूबर 2016 में अनीता सक्सेना की पदोन्नति के बाद विज्ञान शिक्षिका का महत्वपूर्ण पद खाली है। प्रधानाचार्या मंजू पाल 31 मार्च 2017 को सेवानिवृत्त हुईं। तभी से यह पद भी खाली है। गणित की प्रवक्ता कल्पना चौधरी प्रभारी प्रधानाचार्या हैं।
विभाग ने वर्ष 2016 को इसे मॉडल कॉलेज बनाया, तब कॉलेज में छात्राओं की संख्या 465 थी, जो घटकर 417 हो गई है। कॉलेज की सीवर लाइन के लीकेज होने से सभी को परेशानी होती है। विद्यालय की चहारदीवारी के लिए विभाग ने दो लाख रुपये मंजूर किए थे लेकिन जैसे ही विद्यालय प्रबंधन ने दिसंबर 2016 में काम शुरू किया, तो झील विकास प्राधिकरण ने काम रुकवा दिया।
कॉलेज में चार विषयों के शिक्षिकाओं की कमी है। छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए अन्य शिक्षिकाओं की मदद ली जा रही है। शिक्षिकाओं की कमी समेत अन्य समस्याओं के समाधान के लिए विभागीय अधिकारियों के साथ ही संबंधित अधिकारियों से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। छात्राओं की कमी की मुख्य वजह यह है कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक स्कूल खुलने से छात्राएं वहीं पढ़ने लगी हैं।
- कल्पना चौधरी, प्रभारी प्रधानाचार्या
मामला मेरे संज्ञान में है। विद्यालय में प्रधानाचार्या समेत खाली सभी शिक्षिकाओं के पदों को भरने के लिए विभागीय कवायद प्राथमिकता से जारी है।
- कमलेश कुमार गुप्ता, सीईओ नैनीताल