प्रदेश में एक सितंबर को कुमाऊंनी और दो को गढ़वाली भाषा दिवस मनाया जाएगा। पर्वतीय राज्य मंच की ओर से दोनों भाषाओं को सम्मान दिलाने के उद्देश्य से यह आयोजन किया जाएगा। मंच ने सभी प्रदेशवासियों से भी अपने अपने स्तर पर भाषा दिवस मनाने का आह्वान किया है।
शनिवार को प्रेस क्लब में मंच के संस्थापक और आंचलिक फिल्मकार अनुज जोशी ने बताया कि अलग राज्य आंदोलन के दौरान एक सितंबर को खटीमा और दो सितंबर को मसूरी में राज्य के कई लोगों ने शहादत दी थी। राज्य की बोली, भाषा और सांस्कृतिक पहचान के लिए जो आंदोलन हुआ, उसने एक उत्तराखंड का संदेश दिया था। इस दिन और शहीदों को याद करने के लिए मंच की ओर से यह कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि एक सितंबर को देहरादून और दो को मसूरी में भाषा दिवस कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
फिल्म कलाकार गंभीर सिंह जयाड़ा ने सरकार से एक सितंबर को कुमाऊंनी और दो सितंबर को गढ़वाली भाषा दिवस घोषित करने करने की मांग की। महासचिव गिरीश सनवाल ने कहा कि प्रदेश में कभी लोक भाषाओं के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए काम नहीं किया गया। उत्तराखंड देश का एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां स्कूली पाठ्यक्रम में स्थानीय बोली भाषा शामिल नहीं है। उन्होंने स्कूली पाठ्यक्रम में गढ़वाली व कुमाऊंनी भाषा को शामिल करने की मांग की।
इस अवसर पर जितेंद्र पंवार, मीना बिष्ट, मोहित कुमार, अब्बू रावत, सोहन चौहान, विजय शर्मा, हरीश मेहरा, हरेंद्र खत्री, अभिषेक मेंदोला, शैलेंद्र पटवाल, गोविंद नेगी समेत कई लोग मौजूद रहे।