साहित्य संगम पछवादून की मासिक काव्य गोष्ठी
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संवाद न्यूज एजेंसी
विकासनगर। क्षेत्र की साहित्यिक संस्था साहित्य संगम पछवादून की मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन डाकपत्थर में किया गया। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों का विरोध शीर्षक पर आधारित गोष्ठी में कवि-शायरों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से दर्शकों की सराहना बटोरी।
समाजसेवी सुबोध गोयल के आवास पर आयोजित गोष्ठी की शुरुआत द्वीप प्रज्वलित कर सरस्वती वंदना के पाठ से हुई। इसके पश्चात कवियत्री निधि सिंह ने अपनी कविता उठो ए देश के वीरों तुम्हें माटी बुलाती है की प्रस्तुति देकर दर्शकों में जोश भरने का काम किया। युवा कवि दिलप्रीत सिंह ने देशभक्ति की गजल, तुझे देखने के वास्ते यह दिल शिखर गया, मिट्टी का पुतला था मैं रेत से बिखर गया, सुनाई। कवियत्री सरिता गुप्ता ने, दिल की हसरतों को दिल मे दबाऊं कैसे, देशभक्ति रचना दर्शकों के सम्मुख रखी। नीलम शर्मा ने, तेरी यादों को सजाया मैंने, दिल बसेरा ही बनाया मैंने गजल सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। शायद मजाहिर खान ने, जोगीरा धीरे-धीरे बोल, फकीरा धीरे-धीरे बोल, गीत सुनाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।
पवन भार्गव ने, कौन सा वो गम जिसे पिता नहीं पिता, वो अलग बात है कि कहता नही पिता सुनाया। इस अवसर पर संतोष गोयल ने हास्य गीत, दिसंबर का महीना जाड़े ने पकड़ा जोर, सवेरे उठकर दिखता बस कोहरा चारों ओर, सुनाकर दर्शकों को खूब गुदगुदाया। काव्य गोष्ठी में त्रिलोक सिंह रावत व नाथी राम देहाती ने हास्य-व्यंग्य की रचनाओं की प्रस्तुति दी।
इस दौरान आयोजक सुबोध गोयल, डॉ. कामेश्वर प्रसाद डिमरी, मनोहर सिंह, हेमचंद्र सकलानी आदि ने प्रस्तुति दी। गोष्ठी का संचालन डॉ. मदनपाल बिरला गजब ने किया। राष्ट्रगान के साथ गोष्ठी का समापन हुआ।