पिछले 15 सालों से उत्तराखंड के कई इलाकों में बाढ़ की मार झेल रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। सिंचाई विभाग ने भू-कटाव रोकने के लिए नया तरीका अपनाया है।
पहली बार उत्तराखंड में बाढ़ सुरक्षा के लिए जियो टेक्सटाइल ट्यूब के स्टर्ड बनाए जा रहे हैं। ये ट्यूब पक्के तटबंध की तरह काम करेंगे और फौरी मरम्मत के लिए लगाए जाने वाले मिट्टी के कट्टों की लागत से भी आधा धन खर्च होगा। पत्थर की पिचिंग के स्थान पर भी जियो बैग का इस्तेमाल किया जाएगा।
राज्य गठन के बाद से ही तराई क्षेत्र में बाढ़ की समस्या नासूर बनी हुई है। हर साल बरसात के दिनों में बाढ़ से भारी तबाही मचती है। इन 15 सालों में सैकड़ों लोग बाढ़ की भेंट भी चढ़ चुके हैं। हजारों एकड़ कृषि भूमि नदी में समा चुकी है।
हर साल सिंचाई विभाग द्वारा करोड़ों रुपए की लागत से कैलाश, बैगुल, प्रदेश की अन्य नदियों में भूमि कटाव रोकने के लिए मिट्टी से भरे कट्टे लगाए जाते हैं जो बाढ़ में बह जाते हैं। इस बार सिंचाई विभाग नदियों से होने वाले कटाव को रोकने के लिए नया तरीका अपना रहा है। विभाग बाढ़ से बिज्टी पुल, कौंधारतन गांव को बचाने के लिए जियो टेक्सटाइल ट्यूब लगा रहा है।