मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी कार्यकर्ताओं के सुख-दुख में हमेशा खड़े रहते थे। उनके कार्यकाल में पहली बार कार्यकर्ताओं को निचले स्तर तक सरकार में जिम्मेदारी मिली।
दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (सेनि) की पहचान केवल एक सख्त प्रशासक ही नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी के लिए भी अनुशासित सिपाही के तौर पर रही है। उनकी सरकार में पहली बार ऐसा हुआ था कि पार्टी कार्यकर्ताओं को निचले स्तर तक सरकार का हिस्सा बनने का मौका मिला था। वे हमेशा कार्यकर्ताओं के सुख-दुख में साथ खड़े रहते थे।
जनरल खंडूड़ी का नाम देश के साथ ही प्रदेश में भी हमेशा के लिए अमर हो गया। उनके निधन के साथ ही भाजपा संगठन में भी उदासी छाई दिखी। उनके साथ संगठन में रहकर काम करने वाले नेता गमगीन हैं। उनकी कार्यशैली ऐसी थी कि जो उनसे जुड़ गया, वह मरते दम तक उनका मुरीद रहा।
उनकी सरकार में ये व्यवस्था पहली बार की गई थी कि पार्टी कार्यकर्ताओं की बात को अधिकारी गंभीरता से सुनें। उन पर कार्रवाई करें। उनकी ही सरकार में पहली बार ऐसा हुआ था कि 20 सूत्री कार्यक्रम, खाद्य समिति, स्वास्थ्य समिति आदि सरकार की संस्थाओं में राज्य से लेकर ब्लॉक स्तर तक कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी गई थी। जनरल खंडूड़ी जितना प्रेम देश से करते थे, उतना ही राज्य से भी करते थे।
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प्रदेश ही नहीं देश के नेता थे जनरल खंडूड़ी : चुफाल
दूसरी खंडूड़ी सरकार में कैबिनेट मंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रहे वरिष्ठ विधायक बिशन सिंह चुफाल ने कहा कि मेजर जनरल खंडूड़ी केवल राज्य ही नहीं पूरे देश के नेता थे। बताया कि पहले कुमाऊं से गढ़वाल आते समय नजीबाबाद से हरिद्वार तक सात बड़े नाले पड़ते थे। इनसे गुजरना मतलब मौत का खौफ था।