कई बातें ऐसी हैं जिन पर इंसान का नियंत्रण ही नहीं है। वह किसके अधीन है यह रहस्य है। प्रारब्ध के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। पुरुषार्थ और पूर्व जन्म के संस्कार गुंथी हुई बातें हैं।
मानस व व्यवहारगत मनोविज्ञान भी संस्कारों से जुड़ा है। सत्संग व अच्छे लोगों का साथ बेहद आवश्यक है। ज्योतिषशास्त्र समस्या को समझता है और समाधान बताता है। इसलिए रत्न विज्ञान भी ज्योतिषशास्त्र का हिस्सा मात्र है।
रत्न ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद पोखरियाल का कहना है कि रत्न दवा की तरह काम करता है। इसका काम नकारात्मक शक्तियों को न्यूट्रालाइज करना और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करना। कुंडली और हस्तरेखा कांपलीमेंटरी हैं। ज्योतिशास्त्र कोई हवा-हवाई चीज तो है नहीं। यह अस्तित्व को अधिक सौहार्दपूर्ण कायम रखना चाहता है।