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आपदा पीड़ितों का दर्द बांटने दुबई से आई दून की बेटी

Thu, 28 Nov 2013 10:48 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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दुबई की ऐशो आराम की जिंदगी छोड़कर गीता चंदोला तीसरी बार अपनी जन्मभूमि के आपदाग्रस्त क्षेत्रों में पीड़ितों का दर्द बांटने पहुंचीं। यहां उनहोंने न केवल सहायता सामग्री बांटी बल्कि छह बेसहारा बच्चों की परवरिश का जिम्मा भी उठा लिया।
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मूलरूप से पौड़ी के मलांऊ गांव की निवासी गीता चंदोला हाल ही में आठ दिन के दौरे के बाद आपदाग्रस्त क्षेत्र से लौटी हैं। उन्होंने बताया कि वह गुप्तकाशी के लमगौंडी, ल्वारा, पसालत के अलावा कालीमठ गईं। यहां उन्होंने पीड़ितों से बात की और उन्हें सहायता सामग्री बांटी।

गीता ने ल्वारा गांव के छह बच्चों तानि, आयुष गुंसाई, दीपांशु भट्ट, राहुल, मोहित गवाड़ी और प्रफुल्ल की परवरिश की जिम्मेदारी ली है। इन बच्चों के जीवन-यापन से लेकर स्कूल का खर्च भी गीता उठाएंगी।
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उन्होंने बताया कि वह बच्चों की फीस जमा कर आई है। इनमें तीन बच्चे ऐसे हैं, जिनके पिता केदारनाथ आपदा में गुम हो गए।

दो ऐसे बच्चे अपाहिज हैं और एक बच्चा ऐसा है, जिसके परिवार के पास केदारनाथ में कमाई का कोई जरिया नहीं रहा। गीता ने बताया कि उनके पति राकेश चंदोला उनके इस मिशन में उनका पूरा सहयोग करते हैं। गीता ने जब जून में आई आपदा का हाल दुबई में टीवी पर देखा था तो वह खुद को रोक नहीं पाईं।

हाल आज भी वैसे ही
आपदा के कई माह बाद आज भी लोग जिंदगी से जद्दोजहद कर रहे हैं। गीता ने बताया कि रुद्रप्रयाग के सिल्ली गांव में लोग लकड़ी की ट्रॉली से रस्सी के सहारे नदी पार करते हैं जिससे किसी भी वक्त हादसे का डर है।
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कई गांव ऐसे भी हैं जहां लकड़ी के कामचलाऊ पुलों से आवागमन हो रहा है। कुछ गांव तो ऐसे हैं जहां सड़क का नामोनिशान तक नहीं रह गया है।
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