पांच लाख की टप्पेबाजी में पुलिस ने गवाला गैंग के एक आरोपी को जलपाईगुड़ी, पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार कर लिया। घटना में शामिल गैंग के छह अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है। घटना के खुलासे के लिए पुलिस ने करीब 550 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और 100 होटल चेक किए।
एसएसपी दलीप सिंह कुंवर ने बताया कि 12 सितंबर को लाखन सिंह सचान निवासी डोईवाला बैंक से पांच लाख रुपये निकालकर घर जा रहे थे। रास्ते में वह परिचित की ठेली के पास गए तो पास ही जमीन पर दस-दस रुपये के कई नोट बिखरे थे। वहां खड़े व्यक्ति ने बताया कि उनके पैसे जमीन पर गिर गए हैं। जैसे ही नोट उठाने झुके तो वहां मौजूद दूसरा व्यक्ति उनका नोटों से भरा बैग लेकर फरार हो गया। घटना के खुलासे के लिए पुलिस और एसओजी की पांच टीमें बनाई गईं।
सीसीटीवी की फुटेज से पता चला कि घटना के बाद आरोपी अलग-अलग वाहनों से देहरादून और फिर ट्रेन व बस से दिल्ली गए। पुलिस ने करीब 200 कैमरों की फुटेज चेक कर दिल्ली रेलवे स्टेशन और आईएसबीटी तक पीछा किया। उनके हुलिये और अन्य सूचनाओं के आधार टीम ने अन्य राज्यों की पुलिस से संपर्क किया तो पता चला कि पश्चिम बंगाल का गैंग ऐसी घटनाएं करता है। एक टीम उनके आने के रास्ते को चिह्नित कर हरिद्वार के एक होटल पहुंची। यहां एक आरोपी का आधार कार्ड मिला लेकिन वह फर्जी था।
पुलिस ने दिल्ली में करीब 350 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और सौ से अधिक होटल खंगाले। यहां भी एक होटल से हरिद्वार वाला आधार कार्ड मिला। पता चला कि आरोपी जलपाईगुड़ी, पश्चिम बंगाल चले गए। पुलिस ने वहां पहुंचकर जानकारी जुटाई तो पता चला कि करीब 40 किमी दूर फाटापुकुर में टप्पेबाजी करने वाला गवाला गैंग रहता है। दुर्गा पूजा में गैंग के कुछ सदस्य पूजा करने आ सकते हैं।
पुलिस ने इलाके के बाहर मुख्य मार्ग पर दो मंदिरों में डेरा डाल दिया। दशहरे वाले दिन एक आरोपी मंदिर पर पहुंचा तो पुलिस ने उसे दबोच लिया। इस दौरान स्थानीय लोगों ने पुलिस का विरोध भी किया। पूछताछ में आरोपी की पहचान मंजीत गवाला निवासी फाटापुकुर झांझीपुरा, जिला जलपाईगुड़ी के रूप में हुई। उसने टप्पेबाजी की घटना में अपना हाथ कबूला। बताया कि उसके साथ रवि गवाला, जॉनी निवासी, विक्की, सुंदर, शिवा और बीरू भी थे। सभी दिल्ली होते हुए हरिद्वार घूमने आए थे। इसके बाद डोईवाला जाकर टप्पेबाजी की थी।
दस-दस रुपये के नोट जमीन पर फेंककर बनाते हैं शिकार
आरोपी घटना से पहले बैंकों में जाकर रेकी करते हैं और पैसे निकालने वालों की पहचान कर उसका पीछा करते हैं। इसके बाद ध्यान भटकाने के लिए दस-दस रुपये के नोट जमीन पर फेंकते हैं और मौका देखकर पैसों से भरा बैग लेकर फरार हो जाते हैं। आरोपी ने पूछताछ में बताया घटना वाले दिन वे डोईवाला स्थित एसबीआई में दो घंटे तक टारगेट का इंतजार करते रहे। जब एक व्यक्ति ने पांच लाख रुपये निकाले तो वे पीछे लग गए। टप्पेबाजी के बाद आरोपी अलग-अलग निकले और एक प्राइवेट अस्पताल चले गए। यहां तीमारदार के रूप में तीन घंटे तक रुके। इसके बाद कपड़े बदलकर अलग-अलग रेलवे स्टेशन देहरादून और आईएसबीटी पहुंचे। फिर दिल्ली गए और ट्रेन से जलपाईगुड़ी पहुंचे।
घटना के बाद से नहीं किया मोबाइल का इस्तेेमाल
आरोपी इतने शातिर थे कि उन्होंने घटना के बाद से जलपाईगुड़ी तक अपने मोबाइल का इस्तेेमाल नहीं किया। अस्पताल में रुकने के दौरान भी उन्होंने एक-दूसरे से बात नहीं की।