इसके बाद ट्रक के केबिन में अचानक आग लग गई। चालक और परिचालक ने ट्रक से कूदकर जान बचाई। देखते ही देखते ट्रक में आग धधकने लगी। इस बीच चालक और परिचालक के साथ कुछ लोगों ने ट्रक से सिलेंडरों को सड़क से पहाड़ी पर लुढ़का दिया, ताकि वे फटने से बच जाय, लेकिन आग धधकने और सिलेंडर फटने के डर से लोग 200 से तीन सौ मीटर दूर भाग खड़े हुए।
ट्रक में सिलेंडर फटने लगे तो यह सिलसिला दो घंटे तक नहीं रुका। सिलेंडर फटने के धमाके होते ही आसपास के गांव के लोगों में दहशत मच गई। पूरी पहाड़ी धमाकों से दहल उठी। विस्फोट के बाद सड़क पर ट्रैफिक रोक दिया गया। पुलिस ने लैंसडौन-जयहरीखाल की ओर ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया।
सूचना पर पहुंची फायर ब्रिगेड ने आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन धमाकों के कारण वह भी नजदीक नहीं जा सकी। शाम छह बजे किसी प्रकार आग पर काबू पाया गया। बताया गया कि करीब 38 सिलेंडरों को फटने से बचा लिया गया। धमाके में ट्रक के परखच्चे उड़ गए।