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गढ़वाल विवि के पूर्व पुस्तकालयाध्यक्ष को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, जानिए पूरा मामला

Sat, 05 Jan 2019 10:25 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क/अमर उजाला, श्रीनगर
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सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने गढ़वाल विश्वविद्यालय के पूर्व पुस्तकालयाध्यक्ष डा. एके शर्मा के पक्ष में फैसला सुनाया है। विवि प्रशासन ने वर्ष 2011 में डा. शर्मा को बर्खास्त कर दिया था। शर्मा पर फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाने का आरोप था।

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जिला न्यायालय व उच्च न्यायालय द्वारा शर्मा के शैक्षणिक दस्तावेजों को सही ठहराने पर विवि प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी शर्मा के पक्ष में फैसला देते हुए विवि प्रशासन को उनके सभी देयकों के 12 फीसदी ब्याज के साथ दो हफ्ते के भीतर भुगतान करने के आदेश दिए हैं।  

डा. एसके शर्मा ने गढ़वाल विवि के टिहरी परिसर में वर्ष 1982 में बतौर पुस्तकालयाध्यक्ष नियुक्ति पाई थी। शर्मा ने बताया कि 28 वर्ष के सेवाकाल के बाद विवि प्रशासन ने 11 फरवरी 2011 को उन्हें बर्खास्त कर दिया था। विवि प्रशासन ने डा. शर्मा पर फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी पाने का आरोप लगाया था।
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मामले में उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी। शर्मा ने बताया कि वर्ष 2013 में जिला न्यायालय ने भी उनके प्रमाणपत्रों को सही ठहराया था। विवि प्रशासन इस निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में गया था। 23 जुलाई 2018 को हाईकोर्ट ने भी शर्मा के पक्ष में ही फैसला सुनाया। 

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विवि ने फैसले का खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। अब विगत दो जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने भी शर्मा के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसमें विवि प्रशासन को शर्मा के सभी देयकों पेंशन आदि के 12 फीसदी ब्याज के साथ दो सप्ताह के भीतर भुगतान करने के आदेश दिए गए हैं।

शर्मा ने बताया कि कोर्ट के इस आदेश से उन्होंने कुलसचिव व कुलपति को मेल के माध्यम से अवगत करा दिया है। कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने कहा कि शर्मा के पक्ष में कोर्ट का फैसला आने की जानकारी उन्हें मिली हैं, लेकिन उन्होंने अभी फैसला पढ़ा नहीं है।  

जांच समिति पर करेंगे मानहानि दावा  
 डा. शर्मा ने बताया विवि प्रशासन ने उनके शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच के लिए कमेटी गठित की थी। कमेटी ने बिना जांच के ही उनके शैक्षणिक प्रमाणपत्रों को गलत बताते आरोप पत्र तय कर दिया था। उक्त कमेटी में वर्तमान कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल भी सदस्य थीं। शर्मा ने उक्त कमेटी के खिलाफ मानहानि का दावा करने की बात कही है। 
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