उन्होंने कहा कि पुरातन छात्र विद्या दान, अर्थदान या समयदान जो भी संभव हो, उसका दान करे। उनका योगदान संस्थान को सक्षम बनाने में सहयोगी रहेगा। डॉ. निशंक ने कहा कि गढ़वाल विवि हिमालय में बसा बेहतर संस्थानों में से एक है। यहां अपार संभावनाएं हैं।
विज्ञान क्षेत्र हो या आध्यात्म या फिर पर्यावरण, गढ़वाल विवि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तौर पर दुनिया का नेतृत्व कर सकता है। इस दौरान नई शिक्षा नीति को लेकर उन्होंने कहा कि मैकाले की शिक्षा नीति ने जड़ों से विमुख कर दिया था। इसको नई शिक्षा नीति में खत्म किया गया है। इसमें विज्ञान, आध्यात्म, पर्यावरण, दर्शन सब कुछ है।
यह नीति अंतरराष्ट्रीय स्तर की है। कहा कि अब यदि किसी छात्र की पढ़ाई बीच में छूटती है, तो वह कभी भी इसे पूरा कर सकता है। वर्तमान मेें भारत 128 देशों के साथ पारस्परिक शोध कर रहा है। अभी और बेहतर करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विवि ने जो पांच गांव गोद लिए हैं, वह आदर्श गांव बनने चाहिए।