मंगलवार को उपलगांव और बनगांव खत के लोग सदियों से चली आ रही परंपरा निभाने छावनी बाजार के समीप स्थित ठाणा डांडा पहुंचे। सैकड़ों की संख्या में लोग गनियात मेले में शामिल हुए। लोगों ने पारंपरिक तरीके से त्योहार मनाया। एक दूसरे को पर्व की बधाई दी। ठोडा नृत्य आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा।
मंगलवार की सुबह उपलगांव खत के ठाणा, टुंगरा, रिखाड़, बिरमोऊ, लांघा पोखरी, पुरोड़ी आदि गांव के लोग ढोल, दमाऊ और रंणसिंगों के साथ मेला स्थल पर पहुंचे। दोपहर करीब एक बजे बनगांव खत के रावना, पाटी, बुरास्वा, मयरावना, शिर्बा, मैपाऊटा, टुंगरौली, घणता, कोटुवा, कोल्हा, बिसोऊ समेत 18 से अधिक गांव के लोग गाजे बाजे के साथ मेला स्थल पर पहुंचे।
उनका ढोल और दमाऊ से स्वागत किया गया। दोनों खतों के लोगों ने एक दूसरे को बिस्सू की शुभकामनाएं दी। आयोजन समिति ने छावनी परिषद के अध्यक्ष ब्रिगेडियर ऐलन देब साहा, कर्नल सचिन रावत, मुख्य अधिशासी अधिकारी आरएन मंडल, थाना प्रभारी शिशुपाल सिंह राणा को स्मृति चिह्न और अंग वस्त्र पहना कर सम्मानित किया गया। दोपहर बाद दोनों खतों के लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा में हारुल, जैता, रासो, गुंडिया, जंगबाजी की प्रस्तुति दी।
इस मौके पर समिति के अध्यक्ष विवेक जोशी, कोषाध्यक्ष अर्जुन दत्त जोशी, स्याणा दिनेश सिंह सालकराम जोशी, सुनील जोशी, अजवीर चौहान, टीकाराम जोशी, दाताराम जोशी, भाव सिंह रावत, सुनील जोशी आदि मौजूद रहे।
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सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है मेला
चकराता के ठाणा डांडा में पौराणिक और ऐतिहासिक गनियात मेला प्रतिवर्ष बैसाख माह की संक्रांति के तीसरे दिन मनाया जाता है। यह पौराणिक मेला सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है। ठोडा नृत्य (तीर-कमान) मुख्य आकर्षण रहा।
मौडे रे मोडाईऐ केली मोडाऐ
साहिया। खत बमटाड़ के मौका बागी और खत सिलगांव के नगाह डांडा में गनियात मेला धूमधाम से मनाया गया। मौडे रे मोडाईऐ केली मोडाऐ और देवा शिलगुरा तौकें करूं ढालो हारूल पर लोगों ने लोक नृत्य किया। मंगलवार की सुबह खत बमटाड़ के 24 गांव के लोग मौका बागी पंहुचे। खत सिलगांव के 10 गांव के लोग नगाह डांडा पंहुचे। लोगों ने एक दूसरे को गुड़, आटे, चावल से तैयार व्यंजन परोसे। शिलगुर महाराज की पूजा अर्चना की। नाग देवता के मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। लोगों ने क्षेत्र की खुशहाली की प्रार्थना की। संवाद