पोस्टमार्टम दोपहर बाद करीब चार शुरू होकर रात साढ़े 10 बजे तक चला। इसमें डॉक्टरों के पैनल के साथ फॉरेंसिक एक्सपर्ट को भी शामिल किया गया था। सूत्रों का कहना है कि विक्रम के पोस्टमार्टम का विसरा कहीं पर भी सुरक्षित नहीं किया गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि उसकी मौत का कारण स्पष्ट था।