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पीएम मोदी पहले बनारस में गंगा को अविरल करते: शंकराचार्य

Fri, 08 Apr 2016 07:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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शंकराचार्य स्वरूपानंद - फोटो : AmarUjala
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जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि गंगा की धारा को निर्मल और अविरल बनाए रखने के लिए सरकार को गंभीर प्रयास करने चाहिए। गंगा में घटते जलस्तर पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि अभी तक केंद्र सरकार की ओर से इस दिशा में कोई गंभीर कार्रवाई नहीं की गई है।
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वह शुक्रवार को कनखल स्थित श्री शंकराचार्य मठ में पत्रकार वार्ता में बोल रहे थे। जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि गंगा की अविरल धारा में ही जल को प्रदूषण रहित बनाने की शक्ति है, लेकिन बांध बनाकर जिस तरह से गंगा की धारा को रोका जा रहा है, उससे गंगा की धारा अविरल नहीं हो सकती। इसके लिए प्रस्तावित बांध निरस्त किए जाने चाहिए।

गंगा व्यवसाय के लिए नहीं
गंगा में जहाज चलाए जाने की योजना के बारे में उन्होंने कहा कि भगीरथ गंगा को धरती पर मानवमात्र के कल्याण के लिए लाए थे न कि व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने के लिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बनारस में पहुंचकर कहा था कि उन्हें गंगा ने बुलाया है, उन्हें सबसे पहले बनारस में गंगा की धारा को अविरल बनाने का काम करना चाहिए था।
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शंकराचार्यों को लेकर उठ रहे विवाद को लेकर उन्होंने कहा कि देश में चार ही शंकराचार्य हैं इसके अलावा कोई और शंकराचार्य नहीं है। आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित गद्दी पर आसीन संत ही शंकराचार्य हो सकता है। इस अवसर पर उन्होंने सनातन पंचांग का विमोचन भी किया।

शंकराचार्य ने कहा कि सरकार आदि शंकराचार्य की जयंती मनाने की बात कर रही है, इसके लिए उनका मत है कि आदि शंकराचार्य से जुड़े तीन स्थानों जन्म स्थान कालडी के पास स्थित हवाई अड्डे का नाम शंकराचार्य के नाम पर रखा जाए। मध्य प्रदेश में स्थित उनके संन्यास के स्थान के पास स्थित गुफा का जीर्णोद्धार कराए तथा उत्तराखंड में स्थित उनकी क्षतिग्रस्त समाधि का जीर्णोद्धार किया जाए। इस मौके पर कांग्रेस के हरिद्वार ग्रामीण जिलाध्यक्ष तेलूराम प्रधान और युवा नेता दीपक जखमोला आदि मौजूद थे।
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